EU का बड़ा एक्शन! भारत-चीन समेत 50 कंपनियों पर निर्यात प्रतिबंध की तैयारी, रूस कनेक्शन बना वजह
EU ने रूस के खिलाफ 21वें प्रतिबंध पैकेज की घोषणा की है। भारत और चीन समेत कई देशों की 50 कंपनियां एक्सपोर्ट कंट्रोल के दायरे में आ सकती हैं। जानिए पूरा मामला।
नई दिल्ली. यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए यूरोपीय यूनियन (EU) ने अपने 21वें प्रतिबंध पैकेज की घोषणा की है। इस नए पैकेज के तहत भारत, चीन, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात और मध्य एशिया के कई देशों में स्थित करीब 50 कंपनियों को निशाने पर लिया गया है। यूरोपीय संघ का आरोप है कि ये कंपनियां रूस के सैन्य-औद्योगिक तंत्र को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन दे रही हैं।
भारत और चीन की कंपनियों पर पड़ेगा असर
EU के प्रस्तावित प्रतिबंधों का असर भारत, चीन, किर्गिस्तान, कजाकिस्तान, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात में स्थित कई कंपनियों पर पड़ सकता है। इन कंपनियों पर निर्यात नियंत्रण (Export Control) उपाय लागू किए जाएंगे, जिससे यूरोपीय तकनीक, उपकरण और संवेदनशील उत्पादों तक उनकी पहुंच सीमित हो सकती है। यूरोपीय संघ का कहना है कि इन कंपनियों के जरिए रूस मौजूदा प्रतिबंधों से बचने की कोशिश कर रहा है।
रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने की रणनीति
Kaja Kallas ने 21वें प्रतिबंध पैकेज की घोषणा करते हुए कहा कि यूरोपीय संघ का उद्देश्य रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था को कमजोर करना और यूक्रेन में उसके सैन्य अभियान को वित्तीय समर्थन मिलने से रोकना है।
उन्होंने कहा कि ब्रुसेल्स पिछले दो वर्षों में रूस के खिलाफ सबसे व्यापक प्रतिबंध सूची तैयार कर रहा है, जिससे मॉस्को की सैन्य और औद्योगिक क्षमताओं पर सीधा असर पड़ेगा।
ड्रोन और रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियां भी रडार पर
नई प्रतिबंध सूची में ड्रोन निर्माण और रक्षा आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी 30 से अधिक संस्थाओं को शामिल करने की तैयारी है। EU का आरोप है कि ये संस्थाएं रूस के सैन्य उत्पादन और युद्ध संबंधी गतिविधियों को समर्थन प्रदान कर रही हैं। इसके अलावा 50 कंपनियों पर नए एक्सपोर्ट कंट्रोल उपाय लागू किए जाने का प्रस्ताव है।
90 बैंकों और क्रिप्टो प्लेटफॉर्म पर भी शिकंजा
EU के प्रस्तावित पैकेज में केवल कंपनियां ही नहीं बल्कि बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र भी निशाने पर हैं।
- करीब 90 बैंकों की संपत्तियां फ्रीज की जा सकती हैं।
- 30 से अधिक बैंकों के साथ लेनदेन पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
- 11 क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म पर ट्रांजैक्शन बैन लगाने की तैयारी है।
- हथियार निर्माताओं, तेल व्यापारियों और रिफाइनरियों पर भी कार्रवाई का प्रस्ताव है।
यूरोपीय संघ का मानना है कि इन माध्यमों से रूस को अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने में मदद मिल रही है।
तेल, धातु और रसायनों पर भी सख्ती
EU रूस की उत्पादन क्षमता को प्रभावित करने के लिए अतिरिक्त निर्यात प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है। इनमें निकेल पाउडर, विशेष धातुएं और हाई-परफॉर्मेंस मिश्रधातुएं शामिल हैं। इसके साथ ही कुछ उत्पादों के आयात पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है, जिनमें:
- ऑटो पार्ट्स
- कीमती धातुओं के अयस्क
- विशेष रसायन
शामिल हैं।
क्या होगा वैश्विक असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रतिबंधों का असर केवल रूस तक सीमित नहीं रहेगा। भारत, चीन और अन्य देशों की वे कंपनियां भी प्रभावित हो सकती हैं जो वैश्विक सप्लाई चेन में सक्रिय हैं। यदि EU प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो संबंधित कंपनियों के लिए यूरोपीय बाजार में कारोबार करना अधिक कठिन हो सकता है।




