उज्ज्वला योजना में बड़ा बदलाव! अब सिर्फ 4 सिलेंडर पर मिलेगी सब्सिडी, करोड़ों परिवारों पर असर
उज्ज्वला योजना के नियमों में बड़ा बदलाव। अब PMUY लाभार्थियों को साल में केवल 4 LPG सिलेंडर पर 300 रुपये की सब्सिडी मिलेगी। जानिए नए नियम, लाभ और असर।

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों के लिए केंद्र सरकार ने एलपीजी सब्सिडी को लेकर बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब लाभार्थियों को साल में केवल चार एलपीजी रिफिल पर ही 300 रुपये प्रति सिलेंडर की सब्सिडी मिलेगी। इससे पहले योजना के तहत नौ रिफिल तक सब्सिडी का लाभ दिया जा रहा था। सरकार के इस फैसले का असर देशभर के करोड़ों उज्ज्वला परिवारों पर पड़ सकता है।
उज्ज्वला योजना के नियमों में क्या बदला?
नए प्रावधान के अनुसार पीएम उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को अब साल में केवल पहले चार एलपीजी रिफिल पर 300 रुपये प्रति सिलेंडर की डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) सब्सिडी मिलेगी। इससे पहले लाभार्थियों को नौ रिफिल तक यह सुविधा उपलब्ध थी।
2016 से अब तक 10.5 करोड़ से अधिक कनेक्शन
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत वर्ष 2016 में की गई थी। इस योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों की महिलाओं को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराना था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 10.5 करोड़ से अधिक मुफ्त एलपीजी कनेक्शन वितरित किए जा चुके हैं।
सरकार अब भी दे रही है 300 रुपये की सब्सिडी
एलपीजी सिलेंडर पर सरकार की ओर से मिलने वाली 300 रुपये प्रति रिफिल सब्सिडी जारी रहेगी। यह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती है। हालांकि अब सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या सीमित कर दी गई है।
पहले 12, फिर 9 और अब 4 सिलेंडर
उज्ज्वला योजना की शुरुआत में लाभार्थियों को सालाना 12 रियायती सिलेंडरों का लाभ मिलता था। बाद में इसे घटाकर 9 किया गया और अब नए बदलाव के बाद केवल 4 सिलेंडरों तक सीमित कर दिया गया है।
लाभार्थियों को कितना होगा नुकसान?
पहले 9 रिफिल पर 300 रुपये प्रति सिलेंडर के हिसाब से लाभार्थियों को सालाना 2,700 रुपये तक की सहायता मिलती थी। नए नियम लागू होने के बाद अधिकतम वार्षिक सहायता 1,200 रुपये रह जाएगी। यानी पहले की तुलना में प्रति परिवार 1,500 रुपये तक की कमी आ सकती है।
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
सरकार का कहना है कि यह फैसला उज्ज्वला परिवारों की औसत सालाना गैस खपत को ध्यान में रखकर लिया गया है। साथ ही वैश्विक एलपीजी कीमतों में बढ़ोतरी और सब्सिडी के बढ़ते वित्तीय बोझ को भी इस निर्णय का प्रमुख कारण बताया गया है।
तेल कंपनियों पर बढ़ रहा है दबाव
सरकारी तेल विपणन कंपनियां घरेलू एलपीजी सिलेंडरों पर भारी वित्तीय दबाव झेल रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के चलते सब्सिडी व्यवस्था को संतुलित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।




