मध्य प्रदेश

विदिशा का ‘पोषण संजीवनी अभियान’ बना मिसाल, 63% कुपोषित बच्चे हुए स्वस्थ

विदिशा का ‘पोषण संजीवनी अभियान’ मध्यप्रदेश में कुपोषण के खिलाफ सफल मॉडल बनकर उभरा है। 1307 गंभीर कुपोषित बच्चों में से 772 बच्चे स्वस्थ हुए। जानिए अभियान की पूरी कहानी।

भोपाल। मध्यप्रदेश को कुपोषण मुक्त बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के बीच विदिशा जिले का ‘पोषण संजीवनी अभियान’ एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ‘स्वस्थ मध्यप्रदेश’ के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए जिला प्रशासन ने गंभीर कुपोषण के खिलाफ ऐसा अभियान चलाया, जिसने न केवल हजारों बच्चों के जीवन में बदलाव लाया बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण भी पेश किया।

जिला प्रशासन, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की सहभागिता से शुरू हुआ यह अभियान अब राज्य में सुपोषण की नई दिशा तय करता नजर आ रहा है।

1307 गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान से शुरू हुई पहल

जून 2025 में किए गए व्यापक सर्वेक्षण के दौरान विदिशा जिले में 1307 गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान हुई। यह स्थिति प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती थी। इसी चुनौती को अवसर में बदलते हुए कलेक्टर Anshul Gupta के नेतृत्व में ‘पोषण संजीवनी अभियान’ शुरू किया गया।

अभियान का उद्देश्य केवल बच्चों का इलाज करना नहीं, बल्कि उन्हें स्थायी रूप से सुपोषित बनाना और दोबारा कुपोषण के दुष्चक्र में जाने से रोकना था।

हर बच्चे को मिली 3000 रुपये की सुपोषण किट

अभियान के तहत चिन्हित प्रत्येक गंभीर कुपोषित बच्चे को तीन माह तक अतिरिक्त पोषण उपलब्ध कराने के लिए 3000 रुपये मूल्य की विशेष ‘सुपोषण किट’ दी गई।

इस किट में मूंगदाल, बेसन, मुरमुरा, खाद्य तेल, शुद्ध घी, मूंगफली, गुड़ पाउडर, मल्टीग्रेन आटा, सत्तू, चावल और तिल जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल किए गए। यह संतुलित आहार बच्चों को प्रतिदिन लगभग 750 अतिरिक्त कैलोरी उपलब्ध करा रहा है, जिससे उनके स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।

जनभागीदारी बनी सफलता की सबसे बड़ी ताकत

अभियान की सबसे बड़ी विशेषता समाज की सक्रिय भागीदारी रही। स्थानीय व्यापारियों, सामाजिक संस्थाओं और नागरिकों के सहयोग से 39.21 लाख रुपये की राशि स्वेच्छा से जुटाई गई।

इस जनसहयोग के माध्यम से सभी 1307 बच्चों तक सुपोषण किट पहुंचाई गईं। यह पहल सामाजिक उत्तरदायित्व और सामूहिक प्रयास की उत्कृष्ट मिसाल बनकर सामने आई है।

तकनीक और जागरूकता से मिली मजबूती

प्रशासन ने केवल खाद्य सामग्री वितरण तक अभियान को सीमित नहीं रखा। महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से माताओं को पौष्टिक भोजन तैयार करने का प्रशिक्षण दिया।

उन्हें स्थानीय सामग्रियों से लड्डू, हलवा और सत्तू पेय जैसे पौष्टिक व्यंजन बनाने की जानकारी दी गई। साथ ही बच्चों को खिलौना किट, टिफिन और पानी की बोतलें देकर उनके मानसिक और शारीरिक विकास पर भी ध्यान दिया गया।

पोषण ट्रैकर ऐप से हुई सतत निगरानी

अभियान की पारदर्शिता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए ‘पोषण ट्रैकर’ ऐप का उपयोग किया गया। प्रत्येक बच्चे की स्वास्थ्य प्रगति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया गया और नियमित निगरानी की गई।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर बच्चों की स्थिति का आकलन किया, जबकि विभागीय पर्यवेक्षकों ने समय-समय पर वजन और स्वास्थ्य की समीक्षा की।

63 प्रतिशत से अधिक बच्चे हुए स्वस्थ

अभियान के परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे। कुल 1307 गंभीर कुपोषित बच्चों में से 772 बच्चे पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य श्रेणी में लौट आए हैं। इस तरह 63.02 प्रतिशत की प्रभावशाली रिकवरी दर दर्ज की गई।

यह उपलब्धि न केवल विदिशा जिले के लिए गौरव का विषय है, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के लिए एक सफल पोषण मॉडल के रूप में उभरकर सामने आई है।

अगले चरण में 650 नए बच्चों को जोड़ा जाएगा

जिला प्रशासन अब अभियान के दूसरे चरण की तैयारी में जुटा है। आगामी तिमाही में 650 नए गंभीर कुपोषित बच्चों को अभियान से जोड़कर उन्हें भी कुपोषण मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया गया है।

इसके अलावा कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत अडाणी फाउंडेशन के सहयोग से लटेरी, सिरोंज और कुरवाई क्षेत्रों में 500 अतिरिक्त सुपोषण किट वितरित करने की योजना बनाई गई है।

विदिशा मॉडल दे रहा सकारात्मक संदेश

‘पोषण संजीवनी अभियान’ यह साबित करता है कि जब शासन, प्रशासन, सामाजिक संगठन और आम नागरिक एक साझा लक्ष्य के लिए साथ आते हैं, तो कुपोषण जैसी गंभीर सामाजिक चुनौती पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

विदिशा का यह मॉडल अब प्रदेश के अन्य जिलों के लिए प्रेरणा बन रहा है और मध्यप्रदेश को कुपोषण मुक्त बनाने के अभियान को नई गति दे रहा है।

Republic News Desk

इस समाचार पोर्टल के लेखक एवं संपादक हैं। दस वर्षों की पत्रकारिता अनुभव से सत्य और संतुलित खबरें पेश करने का जुनून रखते हैं। अपनी टीम के साथ राजनीति, टेक्नोलॉजी, क्राइम और संस्कृति की गहरी कवरेज देते हैं। पाठकों का विश्वास ही इनका मिशन है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button