ज्वार से बनी कलबुर्गी रोटी बनी हेल्थ और रोजगार की मिसाल, ‘मन की बात’ में PM मोदी ने किया जिक्र
PM मोदी द्वारा सराही गई कर्नाटक की कलबुर्गी रोटी ज्वार से तैयार होती है। जानिए इसके स्वास्थ्य लाभ, बनाने की खासियत और कैसे यह हजारों महिलाओं के लिए रोजगार का माध्यम बन रही है।
भारत की पारंपरिक खाद्य संस्कृति में कई ऐसे व्यंजन हैं जो स्वाद के साथ-साथ सेहत और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करते हैं। कर्नाटक की प्रसिद्ध कलबुर्गी रोटी ऐसा ही एक उदाहरण है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 123वें एपिसोड में इस पारंपरिक रोटी का उल्लेख करते हुए इसकी सराहना की। ज्वार से तैयार होने वाली यह रोटी न केवल पौष्टिक भोजन का विकल्प है, बल्कि हजारों महिलाओं के लिए रोजगार का माध्यम भी बन रही है।
क्या है कलबुर्गी रोटी?
कलबुर्गी रोटी कर्नाटक के Kalaburagi क्षेत्र की पारंपरिक रोटी है, जिसे पहले गुलबर्गा के नाम से जाना जाता था। यह रोटी मुख्य रूप से ज्वार के आटे से बनाई जाती है, जो उत्तर कर्नाटक के प्रमुख अनाजों में से एक है।
अपनी बड़ी आकार, मुलायम बनावट और देसी स्वाद के कारण यह रोटी स्थानीय लोगों के साथ-साथ देशभर के फूड लवर्स के बीच भी लोकप्रिय हो रही है।
कैसे बनाई जाती है यह खास रोटी?
कलबुर्गी रोटी बनाने के लिए ज्वार के आटे को गर्म पानी के साथ गूंथा जाता है। इसके बाद हाथों से थपथपाकर बड़ी और पतली रोटी का आकार दिया जाता है और तवे पर सेंका जाता है। इसे आमतौर पर:
- भरवां बैंगन की सब्जी
- मूंगफली की ग्रेवी
- लहसुन, तिल और मूंगफली की चटनी
के साथ परोसा जाता है।
महिलाओं के लिए बन रही रोजगार का जरिया
कलबुर्गी रोटी सिर्फ एक पारंपरिक भोजन नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम भी बन चुकी है। स्वयं सहायता समूहों और महिला उद्यमियों के जरिए इसका उत्पादन और बिक्री बढ़ी है, जिससे हजारों महिलाओं को रोजगार और आय का नया स्रोत मिला है। यही कारण है कि इस पहल को स्थानीय अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सेहत के लिए क्यों फायदेमंद है ज्वार?
Sorghum (ज्वार) को मोटे अनाजों में बेहद पौष्टिक माना जाता है। इसमें कई आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।
ज्वार के प्रमुख पोषक तत्व
- प्रोटीन
- फाइबर
- आयरन
- मैग्नीशियम
- विटामिन बी कॉम्प्लेक्स
- एंटीऑक्सीडेंट्स
ज्वार की रोटी खाने के फायदे
- वजन नियंत्रित रखने में सहायक: ज्वार में मौजूद फाइबर लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती।
- डायबिटीज मरीजों के लिए बेहतर विकल्प: इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स अपेक्षाकृत कम होता है, जिससे ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।
- हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी: ज्वार में मौजूद पोषक तत्व कोलेस्ट्रॉल संतुलित रखने और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक माने जाते हैं।
- पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है: फाइबर की अच्छी मात्रा होने के कारण यह पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिला सकता है।
मिलेट्स को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम
संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष घोषित किए जाने के बाद देशभर में मोटे अनाजों के प्रति जागरूकता बढ़ी है। कलबुर्गी रोटी जैसी पारंपरिक रेसिपी मिलेट्स को मुख्यधारा में लाने और लोगों को स्वस्थ विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
निष्कर्ष
कलबुर्गी रोटी सिर्फ एक पारंपरिक व्यंजन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, पोषण और महिला सशक्तिकरण का शानदार उदाहरण है। ज्वार से बनी यह रोटी आधुनिक जीवनशैली में भी हेल्दी फूड के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रही है और स्थानीय महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा रही है।




