देश का हर 5वां व्यक्ति हाई BP का शिकार, AIIMS विशेषज्ञ बोले- सिर्फ 2 पॉइंट कम होने से टल सकते हैं लाखों हार्ट अटैक
भारत में हर पांचवां वयस्क हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित है। AIIMS विशेषज्ञों के अनुसार ब्लड प्रेशर में सिर्फ 2 पॉइंट की कमी से लाखों हार्ट अटैक और मौतों को रोका जा सकता है।

भारत में हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) तेजी से एक बड़े स्वास्थ्य संकट के रूप में उभर रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) और विभिन्न स्वास्थ्य अध्ययनों के अनुसार देश का लगभग हर पांचवां वयस्क उच्च रक्तचाप से प्रभावित है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बीमारी अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती है, इसलिए इसे ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जाता है।
हर पांचवां भारतीय हाई BP की चपेट में
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार 15 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 24 प्रतिशत पुरुष और 21 प्रतिशत महिलाएं उच्च रक्तचाप से प्रभावित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में हर चौथा और शहरी क्षेत्रों में हर तीसरा व्यक्ति हाई ब्लड प्रेशर का शिकार है। विशेषज्ञों के अनुसार बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं जिन्हें यह तक नहीं पता कि उनका रक्तचाप सामान्य सीमा से ऊपर है।
40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में बढ़ा खतरा
हालिया अध्ययनों में पाया गया है कि 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों, विशेषकर पुरुषों में हाई ब्लड प्रेशर का खतरा अधिक है। बदलती जीवनशैली, तनाव, शारीरिक गतिविधि की कमी, अधिक नमक का सेवन, जंक फूड और बढ़ता मोटापा इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
सिर्फ 2 पॉइंट BP कम होने से बच सकती हैं लाखों जान
AIIMS के हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार यदि औसत ब्लड प्रेशर में केवल 2 mmHg की कमी भी लाई जाए, तो हर साल लाखों लोगों को हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी रोगों से बचाया जा सकता है।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर 140 mmHg से घटकर 138 mmHg हो जाए, तो इसे चिकित्सकीय रूप से महत्वपूर्ण सुधार माना जाता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे देश में एक लाख से अधिक मौतों को टाला जा सकता है।
दिल, दिमाग और किडनी के लिए बड़ा खतरा
हाई ब्लड प्रेशर को हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी फेलियर और डिमेंशिया जैसी गंभीर बीमारियों का प्रमुख कारण माना जाता है। समस्या यह है कि अधिकांश मरीजों में शुरुआती लक्षण दिखाई नहीं देते, जिससे बीमारी लंबे समय तक बिना पहचान के बढ़ती रहती है। जब तक रोग का पता चलता है, तब तक कई मामलों में शरीर के महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो चुके होते हैं।
भारत में 21 करोड़ से अधिक वयस्क प्रभावित
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट ‘Global Report on Hypertension 2025’ के अनुसार भारत में 21 करोड़ से अधिक वयस्क उच्च रक्तचाप से प्रभावित हैं। यह देश की वयस्क आबादी का 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है। रिपोर्ट के अनुसार:
- केवल 39% मरीजों को पता है कि उन्हें हाई ब्लड प्रेशर है।
- बड़ी संख्या में मरीज नियमित उपचार नहीं ले रहे।
- अधिकांश मरीजों का रक्तचाप नियंत्रित नहीं है।
- केवल सीमित प्रतिशत लोगों का BP लक्ष्य सीमा में रहता है।
प्री-हाइपरटेंशन भी बन रहा चिंता का विषय
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के अध्ययनों में सामने आया है कि देश में लगभग 34 प्रतिशत लोग प्री-हाइपरटेंशन की स्थिति में हैं। यानी उनका ब्लड प्रेशर अभी खतरनाक स्तर पर नहीं पहुंचा है, लेकिन भविष्य में हाई BP विकसित होने की आशंका अधिक है।
हाई BP बढ़ने के प्रमुख कारण
विशेषज्ञों के अनुसार निम्न कारण हाई ब्लड प्रेशर के मामलों में वृद्धि के लिए जिम्मेदार हैं:
- अत्यधिक नमक का सेवन
- जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड
- मोटापा
- तनाव और मानसिक दबाव
- धूम्रपान और शराब का सेवन
- शारीरिक गतिविधि की कमी
- अनियमित नींद
आर्थिक चुनौती भी बन रहा हाइपरटेंशन
विशेषज्ञों का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर अब सिर्फ स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि आर्थिक चुनौती भी बनता जा रहा है। इसके कारण अस्पतालों, दवाओं और दीर्घकालिक उपचार पर होने वाला खर्च तेजी से बढ़ रहा है, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
त्रिपुरा मॉडल बना मिसाल
विशेषज्ञों ने त्रिपुरा में शुरू किए गए डिजिटल हेल्थ मॉडल की सराहना की है। इस पहल में स्वास्थ्यकर्मी मरीजों की जानकारी मोबाइल एप में दर्ज करते हैं, जिससे डॉक्टरों को इलाज संबंधी निर्णय लेने में मदद मिलती है और सीमित संसाधनों में अधिक लोगों तक उपचार पहुंचाया जा सकता है।
हाई BP से बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय
- नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच कराएं।
- नमक का सेवन सीमित करें।
- रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें।
- वजन नियंत्रित रखें।
- धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं।
- तनाव कम करने के लिए योग और ध्यान करें।
- डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं बंद न करें।
NFHS-5 के प्रमुख आंकड़े
- केवल 3 में से 1 व्यक्ति को अपनी बीमारी की जानकारी होती है।
- 5 में से केवल 1 मरीज नियमित उपचार प्राप्त कर पाता है।
- 12 में से केवल 1 व्यक्ति का रक्तचाप नियंत्रण में रहता है।
- ब्लड प्रेशर में 2 पॉइंट की कमी लाखों जान बचा सकती है।




