AI बदलेगा गेम: लाखों IT-BPO नौकरियां जोखिम में, अब क्या करें प्रोफेशनल्स?
विनोद खोसला ने भविष्यवाणी की है कि 2030-35 तक IT और BPO सेक्टर खत्म हो सकता है। उन्होंने भारतीय कंपनियों को AI अपनाने की सलाह देते हुए हेल्थकेयर, एजुकेशन और खेती में AI क्रांति की बात कही।

नई दिल्ली. भारतीय-अमेरिकी अरबपति निवेशक और खोसला वेंचर्स के संस्थापक विनोद खोसला ने आईटी और बीपीओ सेक्टर को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि पारंपरिक आईटी सर्विसेज का मौजूदा मॉडल ज्यादा दिन टिकने वाला नहीं है और 2030 से 2035 के बीच यह उद्योग लगभग खत्म हो सकता है। उन्होंने भारतीय कंपनियों को सलाह दी कि अगर उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बने रहना है तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर तेजी से शिफ्ट होना होगा।
‘पुराने मॉडल पर टिके रहना संभव नहीं’
इकनॉमिक टाइम्स को दिए इंटरव्यू में खोसला ने कहा कि केवल पारंपरिक सर्विसेज पर निर्भर रहना अब संभव नहीं होगा। कंपनियों को नई टेक्नोलॉजी आधारित सेवाएं विकसित करनी होंगी।
उनके मुताबिक:
- IT-BPO का मौजूदा बिजनेस मॉडल तेजी से बदलने वाला है
- जो कंपनियां बदलाव स्वीकार करेंगी, वही टिकेंगी
- भारत के पास AI सर्विसेज में ग्लोबल लीडर बनने का बड़ा मौका है
भारत के पास सबसे बड़ा अवसर
खोसला ने कहा कि दुनिया अभी AI के साथ उतनी सहज नहीं है, जितना भारत हो सकता है। उन्होंने तीन बड़े पॉइंट बताए:
- पश्चिमी देशों से AI टेक्नोलॉजी लेना महंगा है
- अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया में टेक्नोलॉजी की कमी है
- ऐसे में भारत पूरी दुनिया को AI सर्विसेज दे सकता है
AI से नौकरियां घटेंगी, लेकिन उत्पादकता बढ़ेगी
AI के कारण रोजगार पर पड़ने वाले असर पर उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कम लोगों से ज्यादा काम होगा और उत्पादकता बढ़ेगी।
- अगले 15 साल बेहद निर्णायक होंगे
- 2050 तक दुनिया पूरी तरह बदल सकती है
- कई चीजें और मनोरंजन सस्ते हो जाएंगे
हर भारतीय के पास हो सकता है ‘पर्सनल AI डॉक्टर’
खोसला ने AI के सामाजिक प्रभाव को लेकर भी बड़ा विजन पेश किया। उन्होंने कहा कि:
- हर भारतीय के पास 24×7 उपलब्ध AI पर्सनल डॉक्टर हो सकता है
- हेल्थकेयर सस्ता और सुलभ हो जाएगा
- यह सिस्टम आधार से लिंक हो सकता है
किसानों और बच्चों को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा
AI के जरिए शिक्षा और कृषि में क्रांतिकारी बदलाव संभव है:
- 25 करोड़ बच्चे AI ट्यूटर से पढ़ सकेंगे
- छोटे किसानों को AI आधारित कृषि वैज्ञानिक जैसी सलाह मिलेगी
- कम संसाधनों में बेहतर उत्पादन संभव होगा




