वन्यजीव संरक्षण को बड़ी उपलब्धि: 10 वन प्रभागों में 500 से अधिक सारस
उत्तर प्रदेश में शीतकालीन सारस गणना में 20,628 राज्य पक्षी दर्ज किए गए। इटावा वन प्रभाग में सर्वाधिक 3,304 सारस मिले। संरक्षण प्रयासों से संख्या में लगातार वृद्धि।

योगी सरकार द्वारा वन एवं वन्यजीव संरक्षण की दिशा में उठाए गए कदम प्रभावी साबित हो रहे हैं। इनके परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश में राज्य पक्षी सारस की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। प्रदेश में प्रतिवर्ष दो बार (ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन) सारस गणना की जाती है। हालिया शीतकालीन गणना में प्रदेश के 68 वन प्रभागों में कुल 20,628 सारस पाए गए, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 19,994 थी।
मुख्यमंत्री के संरक्षण प्रयासों का परिणाम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पशु-पक्षी और पर्यावरण संरक्षण के प्रति विशेष रुझान रहा है। वर्ष 2017 में सत्ता संभालने के बाद उन्होंने राज्य पक्षी सारस के संरक्षण पर विशेष जोर दिया। आंकड़ों के अनुसार—
- 2023: 19,196 सारस
- 2024: 19,994 सारस
- 2025 (शीतकालीन): 20,628 सारस यह वृद्धि सरकार की सतत संरक्षण नीति का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
इटावा वन प्रभाग शीर्ष पर
शीतकालीन गणना में इटावा वन प्रभाग में सर्वाधिक 3,304 सारस दर्ज किए गए। इसके अलावा 10 वन प्रभागों में सारसों की संख्या 500 से अधिक रही। प्रमुख प्रभागों में संख्या इस प्रकार रही—
- मैनपुरी: 2,899
- औरैया: 1,283
- शाहजहांपुर: 1,078
- गोरखपुर: 950
- कन्नौज: 826
- कानपुर देहात: 777
- हरदोई: 752
- सिद्धार्थनगर: 736
- संतकबीर नगर: 701
29 वन प्रभागों में 100–500 के बीच संख्या
प्रदेश के 29 वन प्रभागों में सारसों की संख्या 100 से 500 के बीच रही। इनमें रायबरेली (480), सीतापुर (452), उन्नाव (385), बरेली (380), सोहगीबरवा (378), बाराबंकी (345), बांदा (270), फिरोजाबाद (258), बस्ती (224) सहित अन्य प्रभाग शामिल हैं।
29 प्रभागों में 100 से कम सारस
शीतकालीन गणना में 29 वन प्रभाग ऐसे भी रहे, जहां सारसों की संख्या 100 से कम दर्ज की गई। इनमें पीलीभीत सामाजिक वानिकी (98), हमीरपुर (95), अयोध्या (82), कुशीनगर (64), मेरठ (51), प्रयागराज (14), आजमगढ़ (12), जौनपुर (8), मऊ (6) और हापुड़ (2) शामिल हैं।
नागरिक सहभागिता ने बढ़ाई गणना की विश्वसनीयता
इस राज्यव्यापी शीतकालीन गणना कार्यक्रम में 10 हजार से अधिक नागरिकों ने भाग लिया, जिससे गणना की विश्वसनीयता और जनभागीदारी दोनों को बल मिला।
विभागीय पक्ष
इस संबंध में अनुराधा वेमुरी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), उत्तर प्रदेश ने बताया कि— “प्रदेश में सारस की ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन, दोनों गणनाएं नियमित रूप से की जाती हैं। हालिया शीतकालीन गणना में राज्य पक्षी की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। गणना से पूर्व सारस बाहुल्य प्राकृतिक वास का सर्वे कर महत्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान की गई। मुख्यमंत्री के निर्देश पर वन विभाग वन्यजीव संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है।”




