धर्म

महाशिवरात्रि 2026 स्पेशल: 3 योगों से खुलेगा भाग्य, जानें चार प्रहर पूजा का महत्व

महाशिवरात्रि 2026 की तिथि, शुभ मुहूर्त और तीन विशेष योग—व्यतिपात, अमृत सिद्धि व सर्वार्थ सिद्धि। जानें चार प्रहर पूजा की विधि और लाभ।

फरवरी माह में पड़ने वाली महाशिवरात्रि भगवान भोलेनाथ की आराधना का अत्यंत पावन पर्व है। इस दिन भक्त उपवास, रुद्राभिषेक और रात्रि जागरण के साथ शिव उपासना करते हैं। इस वर्ष महाशिवरात्रि की तिथि, शुभ मुहूर्त और बनने वाले विशेष योग इसे और भी फलदायी बना रहे हैं।

महाशिवरात्रि कब है?

ज्योतिषाचार्य पंडित सुशील शुक्ला शास्त्री के अनुसार, फाल्गुन कृष्ण पक्ष त्रयोदशी को 15 फरवरी 2026 के दिन महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। त्रयोदशी और चतुर्दशी के मध्य का काल विशेष शुभ माना जाता है। पर्व का आरंभ दोपहर 3:59 बजे के बाद होगा। महाशिवरात्रि में उदयातिथि नहीं ली जाती, उदित पारण करना शास्त्रसम्मत माना गया है।

महाशिवरात्रि पर दिन की शुरुआत कैसे करें?

  • प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें।
  • एक पवित्र कलश में स्वच्छ जल रखें; साथ में शहद, शक्कर, घी, गुड़ व प्रसाद रखें।
  • शिवालय में जाकर दूध, दही, गंगाजल, शहद और शक्कर से अभिषेक करें।
  • बेलपत्र, धतूरा (पत्ता/फल), पुष्प और आम के बौर अर्पित करें।
  • “ॐ नमः शिवाय” का जप करते हुए पूजन, आरती करें।

महाशिवरात्रि पर बन रहे तीन विशेष योग

इस वर्ष महाशिवरात्रि पर तीन महत्वपूर्ण योग बन रहे हैं, जो साधना और शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ माने गए हैं—

1) व्यतिपात योग

  • साधना, दान और ध्यान के लिए अत्यंत फलदायी।
  • मंत्र-जप और ध्यान में एकाग्रता बढ़ती है।

2) अमृत सिद्धि योग

  • शिवकृपा की विशेष प्राप्ति का योग।
  • पवित्र स्नान व पूजन से शुभ फल की सिद्धि मानी जाती है।

3) सर्वार्थ सिद्धि योग

  • नए कार्यों की शुरुआत के लिए श्रेष्ठ।
  • व्यापार, दुकान, सोना-चांदी, भूमि/मकान क्रय जैसे कार्य शुभ माने जाते हैं।

चार प्रहर की पूजा: समय और विधि

  • दिन-रात मिलाकर चार प्रहर
  • प्रथम प्रहर: सुबह 6:00 से 12:00
  • द्वितीय प्रहर: 12:00 से शाम 6:00
  • तृतीय प्रहर: शाम 6:00 से रात 12:00
  • चतुर्थ प्रहर: रात 12:00 से सुबह 6:00

रात्रिकालीन चार प्रहर (विशेष फलदायी)

  • प्रथम: शाम 6:00–9:00
  • द्वितीय: रात 9:00–12:00
  • तृतीय: रात 12:00–सुबह 3:00
  • चतुर्थ: सुबह 3:00–6:00

चार प्रहर की पूजा के बाद आरती, हवन और ब्राह्मण भोज कर पारण करें। इससे मन में शांति और घर-परिवार में सुख-समृद्धि की कामना पूर्ण मानी जाती है।

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