मध्य प्रदेश

युवाओं के कंधों पर विकास की जिम्मेदारी: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

रीवा स्थित अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि अनुसंधान आधारित विकास ही सतत और लाभकारी है।

भोपाल / रीवा. प्रबंधन और वाणिज्य में नवीन अनुसंधान एवं सतत विकास विषय पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस का शुभारंभ करते हुए मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि अनुसंधान आधारित विकास ही दीर्घकालीन और लाभप्रद होता है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी सनातन संस्कृति और भारतीय मूल्यों से जुड़े रहकर ही विकास के मार्ग पर आगे बढ़ना होगा। यह कांफ्रेंस अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के एमबीए विभाग द्वारा पं. शम्भूनाथ शुक्ल सभागार में आयोजित की गई।

आर्थिक प्रगति में भारतीय मूल्यों से समझौता न करें

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आर्थिक तरक्की के लिए भारतीय मूल्यों को दांव पर नहीं लगाना चाहिए। युवाओं से आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि वे नवाचार और अनुसंधान के माध्यम से प्रदेश और देश को सतत विकास की दिशा में आगे ले जाएं।

उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा पर जोर देते हुए कहा कि इससे हटकर किया गया विकास गंभीर परिणाम ला सकता है। प्राकृतिक खेती को उन्होंने अनुसंधान से निकला ऐसा ज्ञान बताया, जिससे मानव और धरती—दोनों को स्वस्थ रखा जा सकता है।

2047 तक विश्वगुरु और बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मंथन से निकला ज्ञान केवल छात्रों के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए लाभकारी होता है। भारत विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर है और वर्ष 2047 तक न केवल विश्वगुरु बनेगा, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी बनेगा।
उन्होंने विद्यार्थियों से नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनने का आह्वान किया।

सतत विकास ही सनातन की मूल अवधारणा

प्रभारी कुलगुरु प्रो. सुनील तिवारी ने कहा कि सतत विकास की अवधारणा सनातन संस्कृति में निहित है। वर्तमान समय में बढ़ते वर्ग संघर्ष के बीच मानवता के संरक्षण की आवश्यकता है और भारतीय संस्कृति ही वैश्विक शांति का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।

नवाचार के बिना विकास अधूरा

प्रो. पद्मेश कुमार ने कहा कि नई शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान परंपरा को सम्मिलित किया गया है। प्रबंधन और वाणिज्य को केवल मुनाफे तक सीमित नहीं रहना चाहिए। प्रभाव आधारित अनुसंधान ही समाज के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।

अमेरिका से आईं डॉ. प्रतिभा सिंह ने कहा कि आधुनिक विकास के लिए नवीन शोध और स्थायी विकास अनिवार्य हैं। वहीं अडानी ग्रुप की प्रतिनिधि एनेट एफ. विश्वास ने कहा कि मैनेजमेंट और वाणिज्य एक-दूसरे के पूरक हैं और जिम्मेदार संस्थान राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं।

6 देशों के प्रतिनिधि, 100 से अधिक शोध पत्र

एमबीए विभागाध्यक्ष डॉ. अतुल पाण्डेय ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस में 110 शोधार्थी प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित हैं, जबकि 85 शोधार्थी ऑनलाइन माध्यम से जुड़ेंगे। उन्होंने बताया कि इस दौरान 100 से अधिक शोध पत्रों का प्रस्तुतीकरण किया जाएगा और 6 देशों के प्रतिनिधि इसमें भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम में कुल सचिव सुरेन्द्र सिंह परिहार, देश-विदेश के विषय विशेषज्ञ, प्राध्यापक तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहीं।

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