उत्तर प्रदेशराज्य

खेती में क्रांति: CM योगी का इंटरक्रॉपिंग मॉडल, किसानों की आय बढ़ाने का मास्टरप्लान

यूपी में किसानों की आय बढ़ाने के लिए CM Yogi Adityanath ने गन्ना आधारित तिलहनी–दलहनी इंटरक्रॉपिंग को मिशन मोड में लागू करने के निर्देश दिए, 2026–31 तक होगा क्रियान्वयन।

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गन्ना आधारित तिलहनी और दलहनी अंतःफसली (इंटरक्रॉपिंग) खेती को बड़े पैमाने पर लागू करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ने के साथ अंतःफसल अपनाकर किसानों की आय केवल दोगुनी नहीं, बल्कि बहुगुणित की जा सकती है।

सरसों–मसूर और उर्द–मूंग से मिलेगा अतिरिक्त उत्पादन

सोमवार को आयोजित उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि गन्ने के साथ सरसों, मसूर, उर्द और मूंग जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की अंतःफसल से किसानों को अतिरिक्त उत्पादन और लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस मॉडल से खेती की लागत कम होगी और पूरे वर्ष स्थिर आय सुनिश्चित की जा सकेगी—वह भी गन्ने की पैदावार प्रभावित किए बिना।

इकाई क्षेत्रफल से अधिक उत्पादन ही रास्ता

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में कृषि योग्य भूमि का क्षैतिज विस्तार अब संभव नहीं है। ऐसे में इकाई क्षेत्रफल से अधिक उत्पादन ही ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य को हासिल करने का प्रभावी मार्ग है। उन्होंने गन्ना आधारित इंटरक्रॉपिंग को यूपी के कृषि भविष्य का नया मॉडल बताते हुए कहा कि यह किसानों को अधिक उत्पादन, अधिक कमाई और जोखिम से सुरक्षा प्रदान करेगा।

2026–27 से 2030–31 तक मिशन मोड में लागू होगी योजना

सीएम योगी ने निर्देश दिया कि यह योजना वर्ष 2026–27 से 2030–31 तक मिशन मोड में लागू की जाए। वर्तमान में प्रदेश में 29.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है, जिसमें 14.64 लाख हेक्टेयर नया बोया गया क्षेत्र और 14.86 लाख हेक्टेयर पेड़ी क्षेत्र शामिल है। इतने बड़े क्षेत्र में तिलहन–दलहन की अंतःफसल जोड़ने से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और प्रदेश व देश को तिलहन–दलहन में आत्मनिर्भरता मिलेगी।

वैज्ञानिक चयन और स्पष्ट रोडमैप के निर्देश

मुख्यमंत्री ने कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से वैज्ञानिक आधार पर अंतःफसल चयन के निर्देश दिए।
उन्होंने भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (IISR) की सिफारिशों के अनुसार— रबी में: सरसों–मसूर जायद में: उर्द–मूंग को प्राथमिकता देने को कहा। साथ ही वर्षवार रोडमैप, सहायता–अनुदान और क्रियान्वयन की स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

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