फाइलों के ढेर से डिजिटल टैब तक: आम बजट की ऐतिहासिक यात्रा
Union Budget 2026: निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को लगातार नौवां बजट पेश करेंगी। जानिए भारत के केंद्रीय बजट का इतिहास, तारीख, समय, डिजिटल बदलाव और बड़ी परंपराओं में हुए परिवर्तन।

नई दिल्ली. देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय बजट पेश करने जा रही हैं। यह उनका लगातार नौवां बजट होगा। इसके साथ ही वह नौ बार लगातार बजट पेश करने वाली भारत की पहली वित्त मंत्री बन जाएंगी। खास बात यह भी है कि यह भारत के इतिहास का 80वां केंद्रीय बजट होगा।
केंद्रीय बजट केवल आय–व्यय का दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की आर्थिक सोच, नीतिगत दिशा और विकास की प्राथमिकताओं का आईना माना जाता है। आज़ादी से पहले से लेकर डिजिटल युग तक, बजट की तारीख, समय और प्रस्तुति के तरीके में कई ऐतिहासिक बदलाव हुए हैं।
भारत में पहली बार कब पेश हुआ बजट
भारत में पहला बजट 7 अप्रैल 1860 को पेश किया गया था, जब देश ब्रिटिश शासन के अधीन था। आजाद भारत का पहला केंद्रीय बजट 26 नवंबर 1947 को तत्कालीन वित्त मंत्री आर.के. शनमुखम चेट्टी ने संसद में प्रस्तुत किया। इस बजट का फोकस आजादी के बाद पुनर्निर्माण और बुनियादी जरूरतों पर था।
28 फरवरी से 1 फरवरी तक का सफर
लंबे समय तक भारत में बजट 28 फरवरी को पेश किया जाता रहा। यह परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही थी। साल 2017 में मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए बजट की तारीख 1 फरवरी कर दी, ताकि बजट से जुड़ी योजनाएं 1 अप्रैल से शुरू होने वाले वित्त वर्ष से पहले लागू की जा सकें और राज्यों को भी बेहतर तैयारी का समय मिल सके।
ब्रीफकेस से ‘बही-खाते’ तक
साल 2019 तक बजट को चमड़े के ब्रीफकेस में संसद लाने की परंपरा थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे बदलते हुए बजट को लाल कपड़े में लिपटी ‘बही-खाते’ शैली में पेश किया, जिसे भारतीय परंपरा से जोड़कर देखा गया।
कागज से डिजिटल बजट तक
पहले बजट भारी-भरकम फाइलों में पेश होता था, लेकिन 2021 में पहली बार भारत का केंद्रीय बजट पूरी तरह डिजिटल रूप में पेश किया गया। इसके साथ ही बजट ऐप भी लॉन्च किया गया, जिससे आम नागरिक आसानी से बजट से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकें।
रेल बजट का विलय: एक ऐतिहासिक फैसला
आजादी के बाद दशकों तक अलग से रेल बजट पेश किया जाता था। लेकिन 2017 में रेल बजट को केंद्रीय बजट में शामिल कर दिया गया। सरकार का तर्क था कि इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और रेलवे का विकास समग्र आर्थिक नीति से जुड़ेगा।
बजट पेश करने का समय भी बदला
एक समय भारत में बजट शाम 5 बजे पेश किया जाता था। लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने इसे बदलकर सुबह 11 बजे कर दिया। तब से आज तक बजट इसी समय पेश किया जाता है।
रविवार को बजट? 2026 को लेकर क्यों चर्चा
आम बजट 2026-27 की तारीख 1 फरवरी 2026 है, जो रविवार पड़ रहा है। इसे लेकर चर्चाएं तेज हैं। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने स्पष्ट किया है कि इस पर अंतिम फैसला संसदीय मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति समय पर लेगी।
हालांकि इतिहास बताता है कि अवकाश वाले दिन बजट पेश होना कोई नई बात नहीं है—
- 2020 में कोविड काल के दौरान रविवार को संसद चली
- 2015 और 2016 में अरुण जेटली ने शनिवार को बजट पेश किया
- 2025 में निर्मला सीतारमण ने भी शनिवार को बजट प्रस्तुत किया
समय के साथ बदली बजट की प्राथमिकताएं
शुरुआती दौर में बजट का फोकस कृषि, सिंचाई और बुनियादी ढांचे पर था। समय के साथ इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, स्टार्टअप, डिजिटल इंडिया, ग्रीन एनर्जी और सामाजिक कल्याण जैसे विषय जुड़े। आज का बजट आत्मनिर्भर भारत, रोजगार सृजन और समावेशी विकास पर केंद्रित नजर आता है।
निष्कर्ष: केंद्रीय बजट में आए ये बदलाव दिखाते हैं कि भारत की आर्थिक नीति समय के साथ अधिक व्यावहारिक, पारदर्शी और आधुनिक होती गई है। तारीख, समय और प्रस्तुति—हर बदलाव का उद्देश्य एक ही रहा है: विकास को गति देना और नीतियों को तेजी से जमीन पर उतारना।




