कैपेक्स बूस्ट: ₹12.20 लाख करोड़ से इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत, रोजगार और कनेक्टिविटी बढ़ेगी
यूनियन बजट 2026 में सरकार ने कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ किया। इंफ्रास्ट्रक्चर, Tier-2 और Tier-3 शहरों के विकास पर खास फोकस।

यूनियन बजट 2026 में सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि देश की आर्थिक विकास दर को तेज करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर को ही मुख्य आधार बनाया जाएगा। निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया कि वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है।
क्या होता है कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex)
कैपेक्स वह सरकारी खर्च है, जो सड़क, रेलवे, मेट्रो, एयरपोर्ट, हाउसिंग और औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी दीर्घकालिक विकास परियोजनाओं पर किया जाता है। कैपेक्स बढ़ने से रोजगार के अवसर, निवेश और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आती है।
एक दशक में कई गुना बढ़ा सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च
वित्त मंत्री ने बताया कि पिछले दस वर्षों में पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर में ऐतिहासिक बढ़ोतरी हुई है।
- 2014-15 में: 2 लाख करोड़ रुपये
- 2025-26 (बजट अनुमान): 11.2 लाख करोड़ रुपये
- 2026-27 (प्रस्तावित): 12.2 लाख करोड़ रुपये
- इस तरह एक दशक में सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च कई गुना बढ़ चुका है।
Tier-2 और Tier-3 शहरों पर विशेष जोर
सरकार का फोकस उन शहरों पर रहेगा जिनकी आबादी 5 लाख से अधिक है। ऐसे शहर अब केवल छोटे कस्बे नहीं, बल्कि नए ग्रोथ सेंटर्स के रूप में उभर रहे हैं।
बजट में इन शहरों के लिए बेहतर सड़कें, मजबूत पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट और औद्योगिक विकास को प्राथमिकता दी गई है।
प्राइवेट निवेश के लिए नए फाइनेंसिंग टूल्स
इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को गति देने के लिए सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट ट्रस्ट (InvIT) और रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट (REIT) जैसे फाइनेंसिंग टूल्स को बढ़ावा देने की बात कही है। इससे निजी क्षेत्र के निवेश को आकर्षित करने में मदद मिलेगी।
रोजगार और रियल एस्टेट सेक्टर को मिलेगा बढ़ावा
बढ़े हुए कैपेक्स का सीधा असर रोजगार सृजन, रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन सेक्टर पर पड़ेगा। छोटे शहरों में बुनियादी सुविधाओं में सुधार होगा और बिजनेस व इंडस्ट्री के लिए बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी।




