
पटना. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू किए गए नए इक्विलिटी रूल्स को लेकर बिहार समेत देशभर में तीखी बहस छिड़ी हुई है। खासकर सवर्ण वर्ग के कुछ संगठनों और छात्रों द्वारा इन नियमों का विरोध किया जा रहा है। इसी बीच पटना के चर्चित कोचिंग शिक्षक गुरु रहमान ने यूजीसी के नए समानता नियमों का खुलकर समर्थन किया है।
मंगलवार को बातचीत के दौरान गुरु रहमान ने कहा कि वह स्वयं सवर्ण समुदाय से आते हैं, लेकिन विश्वविद्यालय स्तर पर उन्होंने धर्म, जाति और लिंग के आधार पर भेदभाव को करीब से देखा है। उन्होंने कहा, “मैं खुद सवर्ण हूं, इसके बावजूद जिस यूनिवर्सिटी से मैंने पढ़ाई की, वहां भेदभाव होते देखा है। इसलिए समानता लाने के लिए यूजीसी के नए नियम बेहद जरूरी हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि समाज में वास्तविक समानता तभी संभव है जब नियमों को लेकर एक तरह का भय और जवाबदेही का वातावरण हो। “जब लोग किसी के खिलाफ गलत करने से डरेंगे और भेदभाव नहीं करेंगे, तभी अपने आप समानता स्थापित होगी,” उन्होंने कहा।
गुरु रहमान ने इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए इसे ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि जिस परिस्थिति में यूजीसी इक्विटी रूल्स लागू किए गए हैं, उसमें सवर्ण वर्ग का विरोध या व्यक्तिगत विरोध कोई मायने नहीं रखता।
गौरतलब है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव को रोकने के उद्देश्य से ये इक्विटी रूल्स लागू किए हैं। वहीं, जनरल कैटेगरी के कुछ छात्र-छात्राओं और संगठनों का कहना है कि इन नियमों का दुरुपयोग किया जा सकता है।
इस मुद्दे को लेकर देशभर में विरोध-प्रदर्शन जारी हैं और मामले को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई है, जहां एक जनहित याचिका दायर की गई है। उत्तर प्रदेश में इस विवाद के चलते भारतीय जनता पार्टी के एक नेता और एक अधिकारी के पद से इस्तीफा देने की खबर भी सामने आई है।




