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हड्डियों का संजीवनी टॉनिक: शंख भस्म से जोड़ों को मिले नया जीवन

आयुर्वेद में शंख भस्म को पाचन, एसिड रिफ्लक्स और हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माना जाता है। जानिए शंख भस्म के लाभ, उपयोग और जरूरी सावधानियां।

आयुर्वेद में उपचार के लिए सदियों से दुर्लभ जड़ी-बूटियों और खनिज-आधारित औषधियों का उपयोग होता आ रहा है। इन्हीं में से एक है शंख भस्म, जिसे आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण और प्रभावकारी भस्म माना जाता है। रसशास्त्र के अनुसार शंख को शुद्ध वर्ग के अंतर्गत खनिज के रूप में वर्णित किया गया है और इसकी भस्म आयुर्वेदिक चिकित्सकों द्वारा दैनिक अभ्यास में उपयोग की जाती है।

शंख भस्म का उपयोग मुख्य रूप से एसिड रिफ्लक्स, सीने में जलन और पेट दर्द जैसी पाचन संबंधी समस्याओं में किया जाता है। इसमें अम्लरोधी (एंटासिड) गुण पाए जाते हैं, जो पाचन तंत्र की अम्लीयता को संतुलित करने में सहायक माने जाते हैं। यह पाचन अग्नि को सक्रिय करने में मदद करती है, जिससे भोजन का पाचन बेहतर हो सकता है।

पाचन और गैस की समस्या में सहायक

यदि पाचन अग्नि कमजोर हो, पेट में दर्द बना रहता हो, गैस के कारण उल्टी या सिरदर्द की शिकायत हो, तो आयुर्वेद में शंख भस्म के उपयोग का उल्लेख मिलता है। यह पाचन प्रक्रिया को संतुलित कर गैस और अपच जैसी समस्याओं में राहत देने में सहायक मानी जाती है।

हड्डियों और दांतों के लिए उपयोग

शंख भस्म मुख्य रूप से कैल्शियम कार्बोनेट से बनी होती है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसे हड्डियों की मजबूती, दांतों के स्वास्थ्य और कैल्शियम की कमी से जुड़ी समस्याओं में उपयोगी बताया गया है। कुछ मामलों में इसे ऑस्टियोपोरोसिस की रोकथाम में सहायक माना जाता है, हालांकि इसका सेवन चिकित्सकीय निगरानी में ही करना चाहिए।

वात–कफ दोष संतुलन में भूमिका

आयुर्वेद के अनुसार शंख भस्म वात और कफ दोष को संतुलित करने में मदद कर सकती है। इन दोषों के असंतुलन से पाचन, त्वचा और अन्य शारीरिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसके अतिरिक्त, कुछ आयुर्वेदिक उपचारों में शंख भस्म का लेपन या सेवन मुहांसे और दाग-धब्बों की समस्या में भी बताया गया है।

सेवन में सावधानी जरूरी

शंख भस्म का सेवन बिना आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह के नहीं करना चाहिए। इसे सीधे नहीं खाया जाता, बल्कि शहद, घी या अन्य उपयुक्त द्रव्यों के साथ मिलाकर, रोग और व्यक्ति की प्रकृति के अनुसार निर्धारित मात्रा में दिया जाता है। गर्भवती महिलाओं और गंभीर रोगों से ग्रसित व्यक्तियों को सेवन से पहले विशेष रूप से चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।

नोट: यह जानकारी सामान्य आयुर्वेदिक संदर्भों पर आधारित है। किसी भी औषधि का उपयोग करने से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह आवश्यक है।

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