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बीज माफिया पर नकेल: घटिया बीज पर 30 लाख जुर्माना, सख्त सजा का प्रस्ताव

सीड एक्ट 2026 में 30 लाख तक जुर्माना, QR कोड से बीज ट्रेसिबिलिटी और सीड कंपनियों का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन। जानिए किसानों को कैसे मिलेगा बेहतर संरक्षण।

नई दिल्ली. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में नए सीड एक्ट 2026 की प्रमुख विशेषताओं और किसानों पर उसके प्रभावों को स्पष्ट किया। उन्होंने इसे किसानों की सुरक्षा, बीज की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाला ऐतिहासिक कदम बताया।

कठोर दंड: 500 से 30 लाख तक जुर्माने का प्रस्ताव

  • केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बीज की गुणवत्ता में लापरवाही अब स्वीकार्य नहीं होगी।
  • पहले जहां अधिकतम 500 रुपये तक जुर्माना था,
  • अब 30 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है।
  • जानबूझकर अपराध करने पर सजा का भी प्रावधान रहेगा।
  • उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी कंपनियां खराब नहीं हैं, लेकिन जो किसान को धोखा देंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

QR कोड से बीज की ट्रेसिबिलिटी

  • नए कानून के तहत देशभर में बीज ट्रेसिबिलिटी सिस्टम लागू किया जाएगा।
  • हर बीज पैकेट पर QR कोड होगा।
  • स्कैन करते ही किसान जान सकेगा कि बीज कहां उत्पादित हुआ, किस डीलर ने दिया और किसने बेचा।
  • इससे घटिया या नकली बीजों की पहचान तुरंत हो सकेगी और जिम्मेदार व्यक्ति पर शीघ्र कार्रवाई संभव होगी।

नकली बीजों पर लगाम

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ट्रेसिबिलिटी लागू होते ही नकली या खराब बीज या तो आएंगे ही नहीं, और अगर आएंगे तो तुरंत पकड़े जाएंगे। जिसने खराब बीज दिया, उसे दंडित किया जाएगा। इससे किसानों को भ्रमित करने वाली कंपनियों और डीलरों की मनमानी पर प्रभावी रोक लगेगी।

सीड कंपनियों का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन

  • अब हर सीड कंपनी का पंजीकरण अनिवार्य होगा।
  • केवल अधिकृत कंपनियां ही बीज बेच सकेंगी।
  • पंजीकृत कंपनियों की जानकारी सार्वजनिक रहेगी।
  • इस व्यवस्था से बाजार में फर्जी कंपनियां समाप्त होंगी और किसानों को विश्वसनीय स्रोत से बीज मिलेगा।

परंपरागत बीजों पर कोई रोक नहीं

  • केंद्रीय मंत्री ने यह भ्रम भी दूर किया कि नया कानून किसानों के परंपरागत बीजों पर रोक लगाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा—
  • “किसान अपने बीज बो सकते हैं, दूसरे किसान को बीज दे सकते हैं। स्थानीय स्तर पर परंपरागत बीज विनिमय की परंपरा जारी रहेगी।”
  • ग्रामीण क्षेत्रों में बोनी के समय किसानों के बीच बीज का आदान-प्रदान और सवा गुना लौटाने जैसी पारंपरिक प्रणाली यथावत रहेगी।

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