सनातन दर्शन बनेगा वैश्विक शांति की आधारशिला: स्वामी राजेश्वरानंद जी महाराज
श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर स्वामी श्री राजेश्वरानंद जी महाराज का संदेश—वैश्विक संकटों का समाधान सनातन संस्कृति में। जगतपुरी स्थित श्री राजमाता जी मंदिर में यज्ञ, सेवा कार्य और युवाओं को योग व सेवा का आह्वान।
नई दिल्ली. अनारकली गार्डन, जगतपुरी स्थित श्री राजमाता जी मंदिर में अंग्रेजी नववर्ष के स्वागत अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर स्वामी श्री राजेश्वरानंद जी महाराज ने कहा कि आज विश्व जिन गहरे संकटों से गुजर रहा है, उनका समाधान केवल सनातन संस्कृति के मूल सिद्धांतों में निहित है। उन्होंने कहा कि अराजकता और भोगवाद से त्रस्त मानवता के लिए भारत शांति दूत बनकर विश्व का मार्गदर्शन कर सकता है।
सनातन संस्कृति में विश्व शांति की क्षमता
कथा के अंतिम दिवस साप्ताहिक यज्ञ की पूर्णाहुति के अवसर पर स्वामी राजेश्वरानंद जी महाराज ने कहा कि सनातन संस्कृति प्रेम, दया, त्याग और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना के माध्यम से संपूर्ण विश्व में शांति स्थापित करने की सामर्थ्य रखती है।
उन्होंने समसामयिक वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां अनेक देश हिंसा और असंतुलन से जूझ रहे हैं, वहीं भारत अपनी सांस्कृतिक चेतना के बल पर विश्व गुरु की भूमिका में उभरता दिखाई दे रहा है।
‘भोग से योग’ की ओर प्रेरित करने वाले अनुष्ठान
सदगुरु राजदरबार के प्रबंधक राम वोहरा ने बताया कि विगत एक सप्ताह से स्वामी जी के सान्निध्य में “भोग से योग” की ओर प्रेरित करने वाले धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हो रहे थे। अंतिम सत्र में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ की पूर्णाहुति की गई।
सेवा के माध्यम से नववर्ष का स्वागत
कड़ाके की ठंड को देखते हुए आयोजन के दौरान जरूरतमंद लोगों को कंबल व शॉल वितरित किए गए। साथ ही, अभावग्रस्त विधवा महिलाओं को प्रसाद स्वरूप राशन सामग्री भी प्रदान की गई। इस सेवा कार्य को नववर्ष की सच्ची साधना बताया गया।
युवाओं को नशा और भोगवाद से दूर रहने का संदेश
भक्तों को संबोधित करते हुए स्वामी जी ने कहा कि अंग्रेजी नववर्ष का स्वागत सनातनी परंपराओं के अनुरूप करने का उद्देश्य युवाओं को नशा, हुड़दंग और अश्लीलता जैसे विनाशकारी मार्गों से दूर कर योग, प्रेम और सेवा के पथ पर अग्रसर करना है।
उन्होंने कहा कि यदि नववर्ष का आरंभ सेवा, सुमिरन और सत्संग से किया जाए, तो पूरा वर्ष सुख, शांति और सकारात्मकता से परिपूर्ण हो जाता है।
बुरी आदतें छोड़ने का संकल्प लें युवा
स्वामी श्री राजेश्वरानंद जी महाराज ने युवाओं से विशेष आह्वान करते हुए कहा कि वे बुरी आदतों को त्याग कर एक सभ्य और सुसंस्कृत समाज के निर्माण में अपनी ऊर्जा लगाएं। यदि किसी दुर्व्यसन को छोड़ना कठिन लगे, तो भी किसी शुभ कार्य का संकल्प अवश्य करें—मन स्वतः शुद्ध होगा और बुराइयां अपने आप छूटती चली जाएंगी।
विश्व शांति की प्रार्थना के साथ समापन
कार्यक्रम के समापन पर विश्व शांति, राष्ट्र की एकता और अखंडता की कामना के साथ स्वकल्याण की अरदास की गई। इसके पश्चात श्रीमद्भागवत पुराण एवं सदगुरुदेव भगवान की आरती संपन्न हुई और विशाल भंडारे का आयोजन कर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।



