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टूट की आशंका या शक्ति प्रदर्शन? कुशवाहा विधायकों से RLM की सियासत गरम

आरएलएम में कलह के संकेत: तीन विधायकों की BJP नेता से मुलाकात के बाद अटकलें तेज। बेटे को मंत्री बनाने पर उपेंद्र कुशवाहा पर परिवारवाद के आरोप, राज्यसभा सीट और मंत्री पद पर खतरे की चर्चा।

पटना. पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में खटपट की सुगबुगाहट तेज हो गई है। बुधवार को आरएलएम के चार में से तीन विधायक कुशवाहा की ‘लिट्टी पार्टी’ से नदारद रहे। इसके बाद उनकी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक वरिष्ठ नेता के साथ मुलाकात की तस्वीर सामने आई, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी।

बेटे को मंत्री बनाने पर नाराजगी!

चर्चा है कि बिहार में नई सरकार के गठन के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनवाया, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष पनप गया। कुशवाहा की विधायक पत्नी स्नेहलता कुशवाहा को छोड़कर अन्य तीनों विधायक नाराज बताए जा रहे हैं। इसी नाराजगी को आरएलएम के भीतर उभरते मतभेदों की जड़ माना जा रहा है।

BJP नेता से मुलाकात, टूट की अटकलें

विधायक माधव आनंद, आलोक सिंह और रामेश्वर महतो की भाजपा के कार्यकारी नेता नितिन नवीन से मुलाकात की तस्वीर सामने आते ही आरएलएम में टूट की अटकलें तेज हो गईं। विभिन्न रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि तीनों विधायक कुशवाहा का साथ छोड़कर भाजपा में शामिल हो सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो इसका सीधा असर आरएलएम और खुद कुशवाहा की राजनीतिक स्थिति पर पड़ सकता है।

2025 विधानसभा चुनाव में RLM का प्रदर्शन

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में आरएलएम ने एनडीए के तहत 6 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 4 सीटों पर जीत मिली थी। जीतने वाले विधायकों में स्नेहलता कुशवाहा के अलावा माधव आनंद, आलोक सिंह और रामेश्वर महतो शामिल हैं। हालांकि, मंत्रिमंडल गठन के समय कुशवाहा ने इन विधायकों में से किसी को मंत्री बनाने के बजाय अपने बेटे दीपक प्रकाश का नाम आगे बढ़ाया, जो फिलहाल किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं।

परिवारवाद के आरोप और इस्तीफे

मंत्री पद के चयन के बाद उपेंद्र कुशवाहा पर परिवारवाद के आरोप लगने लगे। बताया जा रहा है कि आरएलएम के कई पदाधिकारियों ने इस फैसले से असहमति जताते हुए पार्टी से इस्तीफा भी दे दिया है।

राज्यसभा सीट और मंत्री पद पर खतरा?

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यदि आरएलएम के चार में से तीन विधायक पार्टी छोड़ते हैं, तो कुशवाहा की राज्यसभा सदस्यता पर भी संकट खड़ा हो सकता है। वर्ष 2026 में बिहार से राज्यसभा की कुछ सीटों पर चुनाव होने हैं, जिनमें एक सीट कुशवाहा की भी है।
इसके अलावा, मंत्री दीपक प्रकाश के लिए एमएलसी बनने में भी भाजपा और जदयू का सहयोग जरूरी होगा। ऐसे में विधायकों की संभावित टूट से उनके मंत्री पद पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।

आगे क्या?

फिलहाल यह सभी बातें अटकलों पर आधारित हैं। आरएलएम की अंदरूनी राजनीति किस दिशा में करवट लेती है और उपेंद्र कुशवाहा इस संकट से कैसे निपटते हैं, इसका फैसला आने वाला समय ही करेगा।

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