न आश्रय, न उपचार: खुले आसमान तले जी रहे मानसिक रोगी
अनूपपुर के राजेंद्रग्राम में मानसिक रूप से अस्वस्थ बेसहारा लोग सड़कों पर भटक रहे हैं। पहचान और पुनर्वास को लेकर प्रशासन की उदासीनता पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल, मानवीय मदद की मांग।

छबिलाल राजेंद्रग्राम. अनूपपुर जिले के राजेंद्रग्राम में इन दिनों मानसिक रूप से अस्वस्थ और बेसहारा लोग सड़कों पर भटकते नजर आ रहे हैं, लेकिन उनकी देखभाल और पहचान को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दे रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन व्यक्तियों की न तो पहचान की जा रही है और न ही उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की कोशिश हो रही है।
पहचान और पुनर्वास की दिशा में कोई पहल नहीं
क्षेत्र में कम से कम दो से तीन ऐसे लोग घूम रहे हैं, जिनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। वे कहां से आए, उनका नाम क्या है, उनका परिवार कौन है — इसकी जानकारी लेने वाला कोई नहीं है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इनकी जानकारी जुटाकर परिजनों तक पहुंचाया जाए तो उनका जीवन सुधर सकता है, लेकिन इस दिशा में शासन-प्रशासन और पंचायत स्तर पर उदासीनता नजर आ रही है।
किसी घटना की स्थिति में कौन होगा जिम्मेदार?
स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाया है कि यदि इन बेसहारा लोगों के साथ या इनके कारण कोई अप्रिय घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी — प्रशासन, पंचायत या संबंधित विभाग की? पूरे पुष्पराजगढ़ क्षेत्र से अधिकारी-कर्मचारी और आम लोग रोजाना यहां से गुजरते हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
दयनीय हालत, राहगीरों में डर का माहौल
इन लोगों की स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है। कोई फटे कपड़ों में तो कोई बिना कपड़ों के घूमता नजर आता है, जिससे राहगीरों में डर का माहौल भी बन रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल कानून-व्यवस्था का नहीं बल्कि मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा मामला है और इन्हें तत्काल मदद की जरूरत है।
ग्रामीणों की मांग: पहचान कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाए
ग्रामीणों और राहगीरों ने प्रशासन से मांग की है कि इन मानसिक रूप से अस्वस्थ और बेसहारा लोगों की पहचान कर उनके नाम-पते की जानकारी जुटाई जाए और उन्हें पुनर्वास केंद्र या उनके परिजनों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे सुरक्षित जीवन जी सकें।




