संकल्प से सफलता तक— समूह सहयोग ने राशोबाई को बनाया लखपति दीदी
कोंडागांव की राशोबाई मरकाम ने एनआरएलएम ‘बिहान’ योजना के तहत स्व सहायता समूह से जुड़कर 48 हजार से बढ़ाकर 1.67 लाख रुपये सालाना आय हासिल की, बनीं आत्मनिर्भर।

रायपुर. “जहाँ चाह वहाँ राह” की कहावत को कोंडागांव जिले के विकासखंड फरसगांव अंतर्गत ग्राम पंचायत बानगांव की निवासी श्रीमती राशोबाई मरकाम ने साकार कर दिखाया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की बिहान योजना के तहत स्व सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने न सिर्फ अपने जीवन को नई दिशा दी, बल्कि आत्मनिर्भरता की मिसाल भी कायम की है। आज वे विभिन्न आजीविका गतिविधियों से 1 लाख रुपये से अधिक की आमदनी कर रही हैं।
पहले हालात: सीमित आय, बढ़ती मुश्किलें
जय माता दी स्व सहायता समूह की सदस्य बनने से पहले राशोबाई कृषि मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करती थीं और घरेलू कार्यों तक सीमित थीं। सीमित साधनों के कारण परिवार की वार्षिक आय महज 48 हजार रुपये थी, जिससे दैनिक जरूरतें पूरी करना भी कठिन हो जाता था।
समूह से मिला सहारा, बदली आर्थिक तस्वीर
- स्व सहायता समूह से जुड़ने के बाद राशोबाई को
- आरएफ अनुदान: 15 हजार रुपये
- सीआईएफ ऋण: 60 हजार रुपये
प्राप्त हुआ। इस सहयोग से उन्होंने कृषि कार्य के साथ किराना दुकान संचालन और मछली पालन जैसी आजीविका गतिविधियां शुरू कीं। जिला प्रशासन की एनआरएलएम टीम के मार्गदर्शन ने उनके आत्मविश्वास को और मजबूत किया।
दोगुनी आय, बेहतर जीवन स्तर
इन गतिविधियों के सफल संचालन से आज राशोबाई मरकाम की वार्षिक आय बढ़कर लगभग 1 लाख 67 हजार रुपये हो गई है—जो पहले की तुलना में दोगुनी से भी अधिक है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है और जीवन स्तर में सुखद बदलाव आया है। वे अब अपने परिवार के लिए मजबूत आर्थिक सहारा बन चुकी हैं।
‘लखपति दीदी’ की ओर बढ़ता कदम
राशोबाई मरकाम ने शासन की योजनाओं से मिले सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि एनआरएलएम ‘बिहान’ के अंतर्गत स्व सहायता समूहों और टीम के सतत प्रयासों से ग्रामीण महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं “लखपति दीदी” बनकर आत्मसम्मान के साथ जीवन यापन कर सकें।




