कुत्तों की थाली में बिरयानी? नगर निगम पर कांग्रेस का करप्शन आरोप
रायगढ़ में आवारा कुत्तों की नसबंदी के दौरान दिए गए ‘बिरयानी’ बयान पर सियासी विवाद, महापौर जीवर्धन चौहान की सफाई, कांग्रेस का हमला और नगर निगम का जवाब।

रायगढ़. रायगढ़ नगर निगम के आवारा कुत्तों की नसबंदी और उनके आहार को लेकर शहर की राजनीति गरमा गई है। महापौर जीवर्धन चौहान के एक बयान के बाद विपक्ष ने इसे भ्रष्टाचार और फिजूलखर्ची से जोड़ते हुए सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला इतना बढ़ गया कि कुत्तों को खिलाए जाने वाले भोजन तक पर सियासी बहस शुरू हो गई।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, रायगढ़ में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और डॉग बाइट की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए नगर निगम ने नसबंदी अभियान शुरू किया है। इसी क्रम में महापौर जीवर्धन चौहान हाल ही में नसबंदी केंद्र के निरीक्षण पर पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों और डॉक्टरों की टीम ने बताया कि नसबंदी के बाद कुछ कुत्ते एक-दो दिन तक कुछ नहीं खाते, जिससे वे कमजोर हो जाते हैं। ऐसे में उन्हें पौष्टिक आहार दिया जाता है।
‘बिरयानी’ शब्द से भड़का विवाद
महापौर ने बातचीत के दौरान कुत्तों के आहार के उदाहरण देते हुए खिचड़ी, दलिया और बिरयानी का जिक्र किया। इसी बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि कुत्तों को बिरयानी खिलाने के नाम पर अनावश्यक खर्च और संभावित भ्रष्टाचार किया जा रहा है।
कांग्रेस का हमला: चिकन या मटन?
नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष सलीम नियारिया ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अगर आवारा कुत्तों को बिरयानी खिलाई जाएगी तो यह स्पष्ट किया जाए कि वह चिकन की होगी या मटन की। साथ ही सवाल उठाया कि इसके लिए फंड किस मद से खर्च किया जाएगा और क्या शासन से कोई लिखित आदेश है।
एनजीओ को सौंपी गई जिम्मेदारी
नगर निगम ने इस पूरे अभियान की जिम्मेदारी भिलाई स्थित एक एनजीओ को सौंपी है। एनजीओ आवारा कुत्तों को ट्रांसपोर्ट नगर स्थित केंद्र में लाकर नसबंदी करता है और दो दिनों तक उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर निगरानी रखता है। इस प्रक्रिया के लिए तीन डॉक्टरों की टीम तैनात की गई है।
महापौर का स्पष्टीकरण
महापौर जीवर्धन चौहान ने पूरे विवाद पर सफाई देते हुए कहा— “मैं बधियाकरण का निरीक्षण करने गया था। वहां टीम ने कुत्तों की नसबंदी, खान-पान और उपचार की जानकारी दी। बताया गया कि कुछ कुत्ते नसबंदी के बाद एक-दो दिन तक खाना नहीं खाते, इसलिए उन्हें विशेष आहार दिया जाता है। मेरे बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।”
बजट तय, फिर भी बहस जारी
नगर निगम रायगढ़ ने आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण के लिए बजट भी तय किया है। इसी बजट के तहत एनजीओ को समुचित व्यवस्था करने और कुत्तों के स्वास्थ्य का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। बावजूद इसके, शहर में इस मुद्दे को लेकर सियासी बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है।




