ISRO को बड़ा झटका: ऑर्बिट में नहीं पहुंच सका ‘अन्वेषा’, दिशा से भटका रॉकेट
PSLV-C62 मिशन को झटका: सफल लॉन्च के बावजूद तीसरे चरण की गड़बड़ी से ऑर्बिट में तैनात नहीं हो सका EOS-N1 ‘अन्वेषा’ सैटेलाइट। इसरो कर रहा है डेटा विश्लेषण।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO को 2026 के पहले ऑर्बिटल मिशन में झटका लगा है। PSLV-C62 रॉकेट का प्रक्षेपण सफल रहा, लेकिन सैटेलाइट को निर्धारित कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका। यह लॉन्च आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर के फर्स्ट लॉन्च पैड से किया गया था।
तीसरे चरण में गड़बड़ी, दिशा से भटका रॉकेट
ISRO ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि तीसरे चरण (PS3) के दौरान रॉकेट ने अपनी ओरिएंटेशन यानी दिशा-नियंत्रण खो दिया। इसके चलते उपग्रहों को उनकी तय कक्षाओं में स्थापित नहीं किया जा सका। यह लगातार दूसरा मौका है, जब PSLV मिशन में तीसरे चरण के दौरान तकनीकी समस्या सामने आई है।
इसरो प्रमुख ने की विफलता की पुष्टि
इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने मिशन कंट्रोल सेंटर से वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए कहा कि PSLV-C62 मिशन के पहले तीन चरण सामान्य रहे, लेकिन इसके बाद एक विसंगति सामने आई, जिससे उड़ान अपने निर्धारित पथ से भटक गई। उन्होंने बताया कि सभी उपलब्ध वैज्ञानिक डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है और जांच पूरी होने के बाद विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।
क्या बोले इसरो चीफ?
मिशन फेल होने के बाद इसरो चीफ ने कहा, “तीसरे स्टेज में तकनीकी समस्या आई, जिसके कारण रॉकेट की दिशा में बदलाव हुआ। डेटा एनालिसिस जारी है, जल्द ही स्थिति स्पष्ट होगी।” ISRO ने यह भी बताया कि PS3 स्टेज के अंतिम हिस्से में आई गड़बड़ी की गहन जांच शुरू कर दी गई है।
‘अन्वेषा’ के साथ थे 15 अन्य उपग्रह
इस मिशन का मुख्य पेलोड EOS-N1 ‘अन्वेषा’ था, जिसे DRDO ने विकसित किया था। यह एक हाइपरस्पेक्ट्रल अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है, जिसे उन्नत निगरानी और रणनीतिक अनुप्रयोगों के लिए डिजाइन किया गया था।
PSLV-C62 अपने साथ अन्वेषा के अलावा 15 से अधिक छोटे उपग्रह भी लेकर गया था। इनमें भारतीय स्टार्टअप्स और विश्वविद्यालयों के सैटेलाइट शामिल थे। हैदराबाद स्थित ध्रुवा स्पेस ने 7 उपग्रहों में योगदान दिया, जिनमें कम डेटा रेट संचार वाले सैटेलाइट शामिल हैं।
NSIL का 9वां व्यावसायिक मिशन
यह मिशन न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) की ओर से संचालित नौवां व्यावसायिक अर्थ ऑब्जर्वेशन मिशन था। PSLV को अब तक चंद्रयान-1, मंगलयान और आदित्य-एल1 जैसे मिशनों की सफलता के कारण दुनिया के सबसे भरोसेमंद रॉकेट्स में गिना जाता रहा है, लेकिन इस असफलता ने वैज्ञानिकों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।




