उत्तर प्रदेशराज्य

मौनी अमावस्या पर बवाल: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का रथ रोके जाने पर हंगामा, टूटा बैरियर

मौनी अमावस्या पर प्रयागराज संगम में रिकॉर्ड भीड़, सुबह 9 बजे तक डेढ़ करोड़ श्रद्धालुओं ने किया स्नान। शंकराचार्य का रथ रोके जाने पर विवाद, पुलिस-प्रशासन और समर्थकों में नोंकझोंक।

प्रयागराज. मौनी अमावस्या के अवसर पर संगम तट पर आयोजित माघ मेला-2026 में आस्था का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ पड़ा। तड़के चार बजे ब्रह्म मुहूर्त से शुरू हुए स्नान के क्रम में सुबह 9 बजे तक करीब डेढ़ करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई। श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा भी की गई, जिससे माहौल और भक्तिमय हो गया।

राजसी स्नान जुलूस पर रोक, शंकराचार्य का रथ संगम से पहले रोका गया

मौनी अमावस्या पर राजसी स्नान की तरह जुलूस निकालने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के रथ को पुलिस ने संगम पहुंचने से पहले ही रोक दिया। प्रशासन का कहना है कि जुलूस व रथ के लिए पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी।
मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि बिना अनुमति रथ के साथ संगम तट पर जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

संतों से मारपीट का आरोप, पुलिस-प्रशासन से तीखी नोंकझोंक

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने पुलिस पर संतों से मारपीट का आरोप लगाया। उनका कहना था कि उन्होंने पैदल संगम जाने का अनुरोध किया था, लेकिन श्रद्धालुओं की भीड़ दर्शन के लिए उमड़ पड़ती है, जिससे भगदड़ की आशंका बढ़ जाती है।

रथ रोके जाने के बाद शंकराचार्य समर्थकों और पुलिस-प्रशासन के बीच तीखी नोंकझोंक हुई। इसी दौरान पुल नंबर-4 का बैरियर टूटने की सूचना मिली। प्रशासन की ओर से समर्थकों पर बैरियर तोड़ने का आरोप लगाया गया, जबकि शंकराचार्य ने इन आरोपों को निराधार बताया।

भीड़ नियंत्रण के लिए डायवर्जन, आरएएफ तैनात

संगम क्षेत्र में हंगामे और बढ़ती भीड़ के चलते पुलिस ने श्रद्धालुओं को वैकल्पिक मार्गों से डायवर्ट किया। आरएएफ ने कतारबद्ध तरीके से भीड़ को नियंत्रित किया।

सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में अधिकारी और पुलिस बल मौके पर पहुंचे। पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार, मेलाधिकारी ऋषिराज सहित कई वरिष्ठ अधिकारी संगम क्षेत्र में मौजूद रहे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जुलूस के साथ संगम तट पर जाने की अनुमति नहीं है और केवल पांच लोगों के समूह में स्नान किया जा सकता है।

खींचतान के बाद समर्थक हटाए गए, रथ पुलिस ने बाहर निकाला

काफी देर तक चली खींचतान के बाद पुलिस ने शंकराचार्य समर्थकों को वहां से हटाया। रथ अकेला रह जाने पर पुलिसकर्मियों ने उसे स्वयं मेला क्षेत्र से बाहर निकलवाया।

तड़के चार बजे से जारी है स्नान का क्रम

माघ मेले का तीसरा और सबसे बड़ा स्नान पर्व मौनी अमावस्या माना जाता है। प्रशासन के अनुमान के अनुसार इस वर्ष तीन करोड़ से अधिक श्रद्धालु संगम में स्नान के लिए प्रयागराज पहुंचे हैं। स्नान का क्रम देर रात तक जारी रहने की संभावना है।

एक दिन पहले से ही संगमनगरी में उमड़ा श्रद्धालुओं का हुजूम

मौनी अमावस्या से एक दिन पहले ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ प्रयागराज पहुंचने लगी थी। शनिवार शाम छह बजे तक करीब 1.5 करोड़ श्रद्धालु संगम में स्नान कर चुके थे। रविवार की भीड़ से बचने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पर्व से पहले ही स्नान कर लिया।

भीड़ बढ़ने पर मेला क्षेत्र में लागू किए गए प्रतिबंध

शनिवार दोपहर बाद भीड़ बढ़ने पर मेला प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण संबंधी प्रतिबंध लागू कर दिए। जीटी जवाहर और तिकोनिया चौराहे से वाहनों का प्रवेश रोक दिया गया। दोपहर 12:30 बजे मंडलायुक्त, पुलिस आयुक्त, डीएम मनीष कुमार वर्मा, मेलाधिकारी और एसपी मेला नीरज पांडेय संगम वॉच टावर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। पांटून पुलों पर केवल पैदल श्रद्धालुओं की आवाजाही की अनुमति दी गई।

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