मन की शक्ति से संचालित होता है पूरा शरीर
मन की शक्ति जीवन की दिशा तय करती है। जानिए मन की चार अवस्थाएं, एकाग्रता का महत्व और कैसे वर्तमान मन के साथ काम कर व्यक्ति सफलता और आत्मविश्वास हासिल कर सकता है।
मन अत्यंत शक्तिशाली है। यदि व्यक्ति सद्विचारों के साथ आगे बढ़ता है, तो मन के माध्यम से जीवन में श्रेष्ठ परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। प्रसिद्ध विचारक जेम्स एलेन ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि जैसे अच्छे बीजों से सकारात्मक और स्वास्थ्यप्रद फल प्राप्त होते हैं, वैसे ही अच्छे विचार जीवन को सकारात्मक दिशा देते हैं। इसके विपरीत, बुरे विचार नकारात्मक और घातक परिणाम लेकर आते हैं, जिन्हें अंततः व्यक्ति को स्वयं ही भुगतना पड़ता है।
व्यक्तित्व और मन के प्रकार
जिस प्रकार व्यक्ति का व्यक्तित्व बाहरी और आंतरिक दो रूपों में प्रकट होता है, उसी तरह मन की भी अलग-अलग अवस्थाएं होती हैं। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, मन की चार प्रमुख प्रवृत्तियां होती हैं, जो व्यक्ति के जीवन और निर्णयों को प्रभावित करती हैं।
मन की चार अवस्थाएं
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार व्यक्ति का मन मुख्यतः चार प्रकार का हो सकता है—
- वर्तमान मन: जो इस समय हो रही गतिविधि पर केंद्रित रहता है।
- अनुपस्थित मन: जहां व्यक्ति का शरीर तो कार्य में होता है, लेकिन मन कहीं और भटक रहा होता है।
- एकाग्र मन: जिसमें व्यक्ति पूरी तरह एक ही लक्ष्य और कार्य पर केंद्रित रहता है।
- दोहरा मन: जिसमें व्यक्ति के भीतर द्वंद्व बना रहता है—एक मन कार्य करने को कहता है, दूसरा रोकता है।
सफलता की कुंजी: वर्तमान और एकाग्र मन
जो व्यक्ति अधिकतर वर्तमान मन के साथ जीवन में आगे बढ़ते हैं, वे सफलता प्राप्त करते हैं। वहीं, अनुपस्थित और दोहरे मन वाले व्यक्ति अक्सर भटकाव का शिकार हो जाते हैं। वर्तमान मन का अर्थ है—जो अभी हो रहा है, उसी पर पूरी सजगता के साथ ध्यान देना।
एकाग्र मन वाले व्यक्ति किसी एक सत्य और लक्ष्य के प्रति पूर्णतः ग्रहणशील होते हैं और इसी कारण वे असाधारण सफलता प्राप्त करते हैं।
भटकाव का कारण बनता है दोहरा और अनुपस्थित मन
दार्शनिक मार्ले का मानना है कि संसार के किसी भी क्षेत्र में यश और सफलता पाने के लिए एकाग्रचित्त होना अनिवार्य है। दोहरा और अनुपस्थित मन व्यक्ति को लक्ष्य और कार्य से भटका देता है। जब मन कार्यस्थल पर उपस्थित नहीं होता, तो महत्वपूर्ण बातें और निर्णय भी स्पष्ट रूप से समझ में नहीं आते।
मन की सीमाएं और आत्मविश्वास
- मन के कारण ही पूरा शरीर कार्य करता है। कई बार व्यक्ति के मन में शुरू से यह धारणा बैठ जाती है कि वह किसी विशेष काम को नहीं कर सकता।
- कुछ लोग मानते हैं कि वे कभी मंच पर नहीं बोल सकते।
- कुछ के लिए गणित एक भय बन जाता है।
- कई लोग यह सोचकर पीछे रह जाते हैं कि अंग्रेजी न बोल पाने के कारण वे सफल नहीं हो सकते।
- यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब व्यक्ति मन की शक्ति को नहीं पहचान पाता और मन में दोहरी स्थिति बना लेता है।




