उत्तर प्रदेशराज्य

बेटियों के भविष्य को नई दिशा, बागपत मॉडल से मजबूत हुआ सशक्तिकरण

बागपत में ‘नव देवियों की शक्ति’ मॉडल के तहत महिला सशक्तिकरण की 9 योजनाएं लागू। प्रशासन और खाप पंचायतों की साझेदारी से बेटियों को सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता।

लखनऊ. महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देने के लिए बागपत में शुरू की गई ‘नव देवियों की शक्ति’ आधारित 9 योजनाएं प्रदेशभर में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप तैयार यह मॉडल बेटियों के सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता पर केंद्रित है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि अस्मिता लाल की पहल पर प्रशासन और खाप पंचायतों की साझेदारी दिखाई दे रही है—जो उत्तर प्रदेश में अपनी तरह का अनोखा प्रयोग माना जा रहा है।

बागपत में बदली सोच, बदला नजरिया

अब बागपत में बेटी को घर की शान के रूप में देखा जा रहा है। घरों के बाहर बेटियों के नाम की नेम प्लेट लगना इस बदलाव का प्रतीक है। यह सिर्फ नाम नहीं, बल्कि संदेश है—बेटी बोझ नहीं, पहचान है। यह परिवर्तन ‘नवदेवी’ के नौ मंत्रों से शुरू हुआ, जिसने जिले को पूरे प्रदेश के लिए उदाहरण बना दिया।

ये हैं ‘नव देवियों की शक्ति’ की 9 प्रमुख पहल

1. निरा मुहिम: स्वास्थ्य और पर्यावरण का साथ

इस योजना के तहत बालिकाओं और महिलाओं को फ्री कॉटन रियूजेबल सेनेट्री पैड दिए जा रहे हैं। ये 2 से 2.5 साल तक उपयोगी हैं और रीसाइकिल योग्य होने से प्लास्टिक वेस्ट में कमी लाते हैं।

2. बेटी का नाम घर की शान

घरों के बाहर बेटियों के नाम की नेम प्लेट लगाई जा रही हैं। ग्राम प्रधान, कर्मचारी, मीडिया और आमजन इस अभियान से जुड़े हैं, ताकि पितृसत्तात्मक सोच को बदला जा सके।

3. मेरी बेटी मेरी कुलदीपक

एक या दो बेटियों वाले परिवारों को सम्मानित कर यह संदेश दिया जा रहा है कि बेटियां ही समाज का उजाला हैं।

4. कन्या जन्मोत्सव

नवजात बालिका के जन्म पर जन्म प्रमाण पत्र, बेबी किट, मोरिंगा (सहजन) पौधा और बेबी स्वैडल दिया जाएगा। साथ ही अस्पताल में ही सुमंगला सहित पात्र योजनाओं में नामांकन होगा।

5. बुनकर महिलाएं: हुनर से आत्मनिर्भरता

बुनकर महिलाओं को योजनाओं से जोड़कर रोजगार और बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें।

6. सांस अभियान: नवजात की सुरक्षा

स्वास्थ्य कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण देकर नवजात उपचार में सुधार किया गया है, जिससे नवजात मृत्यु दर में कमी आई है।

7. कार्यस्थल पर सम्मान और सुरक्षा

लैंगिक उत्पीड़न से बचाव के लिए कार्यशालाएं और सार्वजनिक स्थलों पर ‘आंचल’ स्तनपान कक्ष की शुरुआत—बड़ौत बस डिपो से यह पहल शुरू हुई।

8. किशोरी का पिटारा

किशोरियों के संवेदनशील सवालों के लिए गोपनीय बॉक्स, जहां प्रशिक्षित काउंसलर वैज्ञानिक तरीके से जवाब देंगे।

9. हर बेटी का सम्मान: खाप पंचायतों के साथ सामाजिक क्रांति

मिशन शक्ति 5.0 के तहत खाप पंचायतों ने दहेज, ऑनर किलिंग और भ्रूण हत्या के खिलाफ एकजुट संकल्प लिया। अवैध अल्ट्रासाउंड पर कार्रवाई कर सख्ती से कानून लागू किया गया।

‘बागपत मॉडल’ का लक्ष्य

यह मॉडल बेटियों को सिर्फ संरक्षण नहीं, बल्कि समान अवसर, सामाजिक स्वीकृति और आत्मनिर्भरता दिलाने पर केंद्रित है। प्रशासन और समाज की साझेदारी, खासकर खाप पंचायतों की भागीदारी, इसे एक मजबूत सामाजिक आंदोलन बनाती है।

“बेटियां समाज की असली शक्ति हैं। हमारा संकल्प है कि उन्हें सम्मान, सुरक्षा, पहचान और अवसर—चारों स्तरों पर पूरा अधिकार मिले।”
— अस्मिता लाल, डीएम बागपत

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