25 जिलों में फसल नुकसान से हड़कंप, मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को दिए राहत के सख्त निर्देश
मध्य प्रदेश के 25 जिलों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं-सरसों की फसल को भारी नुकसान। सीएम मोहन यादव ने सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को राहत राशि और फसल बीमा का लाभ देने के निर्देश दिए।

भोपाल. मध्य प्रदेश में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश के करीब 25 जिलों में तेज बारिश और 63 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चली आंधी ने खेतों में खड़ी फसलों को बर्बाद कर दिया। सबसे ज्यादा असर मालवा-निमाड़ और ग्वालियर संभाग के जिलों में देखा गया है, जहां गेहूं और सरसों की फसल जमीन पर आड़ी पड़ गई।
स्थिति को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी कलेक्टरों को तत्काल फसल नुकसान का सर्वे कराने और प्रभावित किसानों को राहत राशि दिलाने के निर्देश दिए हैं।
तेज हवाओं और ओलावृष्टि से तबाही
मौसम विभाग के अनुसार कई जिलों में बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई, वहीं 63 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चली तेज हवाओं ने फसलों को खेतों में गिरा दिया। इससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।
सीएम के सख्त निर्देश: कोई किसान सर्वे से न छूटे
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि – “सभी कलेक्टर अपने-अपने जिलों में तत्काल फसल नुकसान का सर्वे कराएं और प्रभावित किसानों को प्राथमिकता के आधार पर राहत राशि व फसल बीमा का लाभ दिलाएं।”
राज्य सरकार ने सर्वे के आधार पर मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और कुछ जिलों को राज्य राहत कोष (SRF) से राशि भी जारी की जा चुकी है।
जहां सर्वे पूरा, वहां राशि वितरण शुरू
जिन जिलों में फसल नुकसान का प्रथम चरण का सर्वे पूरा हो चुका है, वहां किसानों को राहत राशि का वितरण शुरू कर दिया गया है। इससे प्रभावित किसानों को त्वरित सहायता देने की कोशिश की जा रही है।
जनवरी में भी हुआ था नुकसान
जनवरी महीने में भी मौसम खराब होने से फसलों को नुकसान हुआ था। उस समय भी राज्य सरकार ने सर्वे कराकर मुआवजा और फसल बीमा का लाभ दिलाने की प्रक्रिया शुरू की थी।
अधिकारियों की लापरवाही पर सवाल
एक ओर सरकार साल 2026 को ‘कृषि वर्ष’ के रूप में मना रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर अधिकारियों की जानकारी का अभाव चिंता बढ़ा रहा है। इस मामले में राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव से संपर्क करने पर उन्होंने अनभिज्ञता जताई, जिससे किसानों को लेकर प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।




