मध्य प्रदेश

देशभर में बैंक हड़ताल: ‘फाइव डे वीक’ को लेकर लाखों कर्मचारियों का शक्ति प्रदर्शन

मध्य प्रदेश में पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग को लेकर 40 हजार बैंककर्मी हड़ताल पर हैं। 7 हजार से अधिक शाखाएं बंद, चेक क्लियरेंस और नकद लेन-देन प्रभावित।

भोपाल. मध्य प्रदेश में मंगलवार को करीब 40 हजार बैंककर्मी हड़ताल पर हैं। पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने की मांग को लेकर हो रही इस हड़ताल के कारण प्रदेशभर की 7 हजार से अधिक बैंक शाखाओं में ताले लटके हुए हैं। इसका सीधा असर चेक क्लियरेंस, नकद लेन-देन और अन्य बैंकिंग सेवाओं पर पड़ा है, जबकि कई स्थानों पर एटीएम में नकदी की कमी की आशंका भी जताई जा रही है।

एक ही दिन में लाखों करोड़ रुपये के बैंकिंग कारोबार पर असर पड़ने का अनुमान है। यह हड़ताल यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर हो रही है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर सहित पूरे प्रदेश में सरकारी और निजी—दोनों क्षेत्रों की बैंकिंग सेवाएं बाधित हैं।

इन बैंकों में लटके ताले

यूनियन पदाधिकारियों के अनुसार, सरकारी क्षेत्र की 12 प्रमुख बैंकों—बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, केनरा बैंक, सेंट्रल बैंक, इंडियन बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया—के अधिकारी व कर्मचारी हड़ताल में शामिल हैं। निजी बैंकों में भी कामकाज प्रभावित होने की संभावना है।

पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग

बैंककर्मियों की प्रमुख मांग है कि बैंकिंग उद्योग में सप्ताह में पांच कार्य दिवस लागू किए जाएं। वर्तमान व्यवस्था के तहत केवल दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश रहता है, जबकि अन्य शनिवार कार्य दिवस होते हैं। यूनियनों का प्रस्ताव है कि सभी शनिवार अवकाश घोषित कर सोमवार से शुक्रवार तक कार्य घंटे समायोजित किए जाएं।

दो साल से अटका है प्रस्ताव

यूएफबीयू के मध्य प्रदेश को-ऑर्डिनेटर वी.के. शर्मा के अनुसार, वर्ष 2015 के समझौते में इस मांग पर विचार का आश्वासन दिया गया था। 2022 में केंद्र सरकार और भारतीय बैंक संघ (IBA) के साथ चर्चा हुई और 2023 में यह सहमति बनी कि सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन 40 मिनट कार्य घंटे बढ़ाकर शेष शनिवारों को अवकाश दिया जाएगा। यह प्रस्ताव सरकार को भेजा गया, लेकिन पिछले दो वर्षों से स्वीकृति लंबित है।

पहले भी टल चुकी है हड़ताल

सरकार की ओर से ठोस प्रतिक्रिया न मिलने पर यूएफबीयू ने मार्च 2025 में दो दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया था, जिसे “मामला विचाराधीन है” के आश्वासन पर स्थगित कर दिया गया था। अब भी मांगें पूरी न होने पर बैंककर्मियों ने एक बार फिर हड़ताल का रास्ता अपनाया है।

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