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नई रिपोर्ट का दावा: मिलान-कोर्टिना 2026 में स्पॉन्सरशिप बनी पर्यावरणीय खतरा

मिलान-कॉर्टिना विंटर ओलंपिक 2026 से पहले आई ‘Olympics Torched’ रिपोर्ट में दावा—गेम्स और फॉसिल फ्यूल स्पॉन्सरशिप से लाखों टन CO₂ उत्सर्जन, तेजी से पिघलेगी बर्फ और ग्लेशियर।

इटली में 6 से 22 फरवरी 2026 तक होने वाले मिलान-कॉर्टिना विंटर ओलंपिक गेम्स से पहले एक नई रिपोर्ट ने गंभीर चेतावनी दी है। ‘Olympics Torched’ नामक इस रिपोर्ट को Scientists for Global Responsibility (SGR) और New Weather Institute ने जारी किया है। यह रिपोर्ट विश्व स्नो डे (18 जनवरी 2026) के अवसर पर प्रकाशित हुई।

रिपोर्ट के अनुसार, ओलंपिक्स की वे स्पॉन्सर कंपनियां जो अत्यधिक प्रदूषण फैलाती हैं, बर्फ और स्नो कवर के तेजी से पिघलने की बड़ी वजह बन रही हैं। विंटर स्पोर्ट्स का अस्तित्व बर्फ पर निर्भर है, लेकिन यही इवेंट और उससे जुड़ी गतिविधियां बर्फ को खत्म करने में योगदान दे रही हैं।

ओलंपिक्स से कितना होगा कार्बन उत्सर्जन?

रिपोर्ट में आंकड़ों के साथ चेतावनी दी गई है—

  • केवल गेम्स के आयोजन से लगभग 9.3 लाख टन CO₂ उत्सर्जन
  • करीब 2.3 वर्ग किलोमीटर स्नो कवर खत्म होने की आशंका
    (लगभग 1300 हॉकी रिंक के बराबर क्षेत्र)
  • 1.4 करोड़ टन से अधिक ग्लेशियर बर्फ पिघलने का अनुमान

स्पॉन्सरशिप से बढ़ेगा संकट

रिपोर्ट के मुताबिक, ओलंपिक गेम्स के तीन प्रमुख स्पॉन्सर—

  • तेल और गैस कंपनी Eni
  • कार निर्माता Stellantis
  • इटली की एयरलाइन ITA Airways
  • ये सभी उच्च कार्बन उत्सर्जन वाली कंपनियां हैं।

अतिरिक्त उत्सर्जन का अनुमान

  • स्पॉन्सरशिप डील्स से 13 लाख टन अतिरिक्त CO₂
  • कुल उत्सर्जन में 40% से अधिक वृद्धि
    (करीब 2.3 मिलियन टन CO₂)
  • 5.5 वर्ग किलोमीटर स्नो कवर का नुकसान
    (3000 से ज्यादा हॉकी रिंक जितना क्षेत्र)
  • 3.4 करोड़ टन ग्लेशियर बर्फ पिघलने की आशंका
  • रिपोर्ट के अनुसार, Eni अकेले अतिरिक्त उत्सर्जन का आधे से अधिक हिस्सा जिम्मेदार होगी।

स्पॉन्सरशिप के जरिए इन कंपनियों की ब्रांडिंग बढ़ती है, जिससे तेल, गैस, कार और फ्लाइट्स की खपत बढ़ती है—और प्रदूषण और तेज होता है।

एथलीट्स और वैज्ञानिकों की कड़ी चेतावनी

एथलीट्स की राय: स्वीडन के क्रॉस-कंट्री स्कीयर Björn Sandström कहते हैं कि ओलंपिक्स से उत्सर्जन पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता, लेकिन इसे कम करना जरूरी है।

उनका कहना है कि फॉसिल फ्यूल स्पॉन्सरशिप से जाने वाला संदेश जलवायु विज्ञान के खिलाफ है और यह विंटर स्पोर्ट्स के भविष्य को खतरे में डालता है।

ग्रीनलैंड की बायएथलीट और वर्ल्ड जूनियर चैंपियन Ukaleq Slettemark का कहना है कि यह पूरी तरह विरोधाभासी है कि विंटर स्पोर्ट्स को वही कंपनियां प्रमोट कर रही हैं जो सर्दियों को खत्म कर रही हैं।

वैज्ञानिकों की चेतावनी

SGR के निदेशक Stuart Parkinson के अनुसार,

  • “विंटर स्पोर्ट्स जलवायु परिवर्तन के शिकार भी हैं और कारण भी।”
  • पिछले पांच वर्षों में:
  • इटली में 265 स्की रिसॉर्ट्स बंद हो चुके हैं
  • फ्रांस और स्विट्जरलैंड में भी कई सुविधाएं बंद हो गई हैं

भारत के हिमालय पर भी असर

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह समस्या केवल यूरोप तक सीमित नहीं है। भारत के हिमालयी क्षेत्रों में पहले ही—

  • बर्फबारी में कमी
  • तापमान में वृद्धि
  • ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने

जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। ओलंपिक्स जैसे बड़े इवेंट्स से बढ़ता प्रदूषण हिमालय पर भी गंभीर असर डाल सकता है, जहां लाखों लोग पानी और पर्यटन पर निर्भर हैं।

क्या हैं संभावित समाधान?

रिपोर्ट और कैंपेनर्स ने कई सुझाव दिए हैं—

  • नए वेन्यू और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण से बचें
  • हवाई यात्रा से आने वाले दर्शकों की संख्या सीमित करें
  • फॉसिल फ्यूल और हाई-पॉल्यूशन कंपनियों की स्पॉन्सरशिप समाप्त करें
  • ओलंपिक्स को क्लीन एनर्जी और क्लाइमेट सॉल्यूशंस का मंच बनाएं

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