पितृ कृपा का योग: तर्पण के इस पावन दिन का महत्व
मार्गशीर्ष अमावस्या शनिवार को—शनैश्चरी अमावस्या के विशेष उपाय। पितृ तर्पण, शनि पूजा, दान और राशियों के अनुसार उपायों से संकटों से मुक्ति और उन्नति के योग।
इस बार मार्गशीर्ष अमावस्या शनिवार को पड़ रही है, जिसे शनैश्चरी अमावस्या भी कहा जाता है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह अमावस्या अत्यंत फलदायी मानी जा रही है। उच्च के बृहस्पति वृश्चिक राशि में स्थित सूर्य, शनि, शुक्र और चंद्रमा पर पंचम दृष्टि तथा केतु पर नवम दृष्टि डालकर विशेष कृपा बरसा रहे हैं। ग्रहों की इस सशक्त स्थिति में अमावस्या का होना पितरों के स्मरण, तर्पण और दान के लिए श्रेष्ठ संकेत माना गया है।
पितृ तर्पण का विशेष महत्व
यूं तो हर अमावस्या का अपना धार्मिक महत्व होता है, लेकिन शनैश्चरी अमावस्या पर पितरों को अर्पित किया गया भोग और तर्पण अनेक संकटों को दूर कर जीवन-पथ पर उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। इस दिन परिवार के साथ उपलब्ध अन्न और सामग्री श्रद्धापूर्वक पितरों को अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है।
किन राशियों पर शनि का प्रभाव
जिनकी मेष और सिंह राशि है, वे शनि की ढैया से, जबकि तुला, वृश्चिक और धनु राशि वाले शनि की साढ़ेसाती से प्रभावित माने जाते हैं।
इन राशियों के जातकों को इस दिन पिप्पलाद मुनि की कथा (भविष्यपुराण) तथा राजा दशरथ कृत शनि स्तोत्र (पद्मपुराण) का पाठ अवश्य करना चाहिए।
यदि आपका मेष, वृष, कन्या, तुला, मकर या कुंभ लग्न है और शनि की साढ़ेसाती/ढैया का प्रभाव चल रहा है, तो इस दिन पूजा-अर्चना विशेष फल देती है।
दान, नीलम और पूजा से मिलने वाले लाभ
- संभव हो तो 3–5 रत्ती नीलम का दान करें।
- शुक्ल पक्ष के किसी शनिवार को जन्मलग्न अनुकूल होने पर ही नीलम धारण करें।
- पूजा से करियर की बाधाएं, पुराने रोग, कर्ज और विवाह संबंधी अड़चनें दूर होने की संभावना बनती है।
- जिनकी कुंडली में पितृ दोष के कारण संतान संबंधी बाधा की आशंका हो, वे शनि पूजा के बाद सरसों का तेल, काले तिल, काली उड़द का दान अवश्य करें।
- सर्दी के मौसम में कंबल या ऊनी वस्त्र का दान विशेष शुभ माना गया है।
आचरण और संकल्प का महत्व
शनि न्यायप्रिय ग्रह माने जाते हैं। जो लोग दूसरों—विशेषकर अपने नौकरों/कर्मचारियों—का अपमान करते हैं या कष्ट देते हैं, उनसे शनि अप्रसन्न होते हैं। इस दिन शनि से पीड़ित राशियों को यह संकल्प लेना चाहिए कि वे किसी को न सताएंगे और न्यायपूर्ण आचरण अपनाएंगे।
बुजुर्गों की सेवा से प्रसन्न होते हैं पितर
जिनकी कुंडली में शनि नीच राशि मेष में स्थित हों, उन्हें शनैश्चरी अमावस्या पर पितरों को भोग और तर्पण अवश्य करना चाहिए। वैसे तो बुजुर्गों की सेवा सदैव करनी चाहिए, लेकिन इस दिन विशेष रूप से ऐसा कोई कर्म न करें जिससे उन्हें मानसिक या शारीरिक कष्ट हो। उनकी इच्छाओं का सम्मान और पूर्ति पितरों की कृपा का मार्ग खोलती है।




