धर्म

चिंता, तनाव और बेचैनी से मुक्ति: मन की व्यथा पर नियंत्रण के सूत्र

मन के संकल्पों पर नियंत्रण से जीवन में सकारात्मक बदलाव संभव है। ध्यान और आध्यात्मिक अभ्यास द्वारा नकारात्मक विचारों को रोककर शुद्ध व रचनात्मक सोच कैसे विकसित करें, जानें इस लेख में।

कहते हैं— जैसा संकल्प, वैसी सृष्टि। अर्थात हम जैसा सोचते हैं, हमारे आसपास का संसार भी धीरे-धीरे वैसा ही आकार लेने लगता है। यही कारण है कि आज लगभग हर डॉक्टर अपने मरीज को एक ही सलाह देता है— शुभ और सकारात्मक सोच रखेंगे तो बीमारी से जल्दी उबर पाएंगे। सकारात्मक विचार न केवल मन को मजबूत बनाते हैं, बल्कि शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं।

क्या मन को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है?

अधिकांश लोगों के मन में यह प्रश्न उठता है कि क्या वास्तव में ऐसा संभव है कि मन में कोई भी अशुद्ध या नकारात्मक संकल्प प्रवेश ही न करे? जिन लोगों ने अपने मन पर नियंत्रण पाने की कला सीख ली है, उनका मानना है कि आध्यात्मिक अभ्यास के माध्यम से यह कठिन लगने वाली प्रक्रिया भी सहज बन सकती है।

जैसे डॉक्टर कहते हैं कि यदि दिन में हर घंटे एक गिलास पानी पीने की आदत डाल ली जाए तो शरीर कई बीमारियों से सुरक्षित रह सकता है, ठीक उसी प्रकार हर घंटे केवल एक मिनट का ध्यानाभ्यास (मेडिटेशन) मन को व्यर्थ और अशुद्ध संकल्पों से बचाने में सहायक हो सकता है।

मन का ट्रैफिक कंट्रोल: एक सरल लेकिन प्रभावी विधि

यह एक सहज और प्रभावशाली विधि है— मन के संचार पर नियंत्रण, जिसे हम “मन का ट्रैफिक कंट्रोल” कह सकते हैं। जिस प्रकार चौराहे पर खड़ा ट्रैफिक पुलिसकर्मी यह भली-भांति जानता है कि कब और किस दिशा से वाहनों को आगे बढ़ने देना है और कब रोकना है, ताकि व्यवस्था में कहीं भी अव्यवस्था, तनाव या टकराव न हो— ठीक उसी तरह मन के भीतर भी नियंत्रण आवश्यक है।

जब परिस्थितियां, व्यक्ति या वातावरण प्रतिकूल हों, तब नकारात्मक, विरोधात्मक और विनाशकारी विचारों को रोककर शुद्ध, सकारात्मक और रचनात्मक संकल्पों को जन्म देना ही मन के ट्रैफिक कंट्रोल की वास्तविक कला है।

दैनिक अभ्यास से मिलेगी आत्मिक शक्ति

आइए, आज से ही यह संकल्प लें कि सुबह से लेकर रात तक हर घंटे केवल एक मिनट के लिए सभी गतिविधियां रोककर अपने विचारों पर ध्यान दें। स्वयं को केवल भौतिक शरीर नहीं, बल्कि एक शांत, शुद्ध और चेतन आत्मा के रूप में अनुभव करें।

परमात्मा की दिव्य स्मृति में रहकर उनकी सकारात्मक ऊर्जा को आत्मसात करने का अभ्यास करें। यह अभ्यास न केवल मन को स्थिरता देगा, बल्कि पाप कर्मों से दूर रहने और श्रेष्ठ जीवन मूल्यों को अपनाने की आंतरिक शक्ति भी प्रदान करेगा।

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