धर्म

दुर्लभ संयोग का पर्व: 19 साल बाद महाशिवरात्रि, महाकाल मंदिर में भव्य तैयारी

महाशिवरात्रि 2026 पर 19 साल बाद दुर्लभ योग बन रहा है। त्रिकोण योग और सर्वार्थ सिद्धि योग में चार प्रहर पूजा का विशेष महत्व, महाकालेश्वर मंदिर में तैयारियां तेज।

उज्जैन. पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी–चतुर्दशी के संधिकाल में महाशिवरात्रि मनाई जाती है। इस वर्ष यह पर्व 15 फरवरी, रविवार को है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह महाशिवरात्रि विशेष मानी जा रही है—इस दिन सूर्य, बुध, शुक्र और राहु कुंभ राशि में, केतु सिंह राशि में तथा चंद्रमा मकर राशि में गोचर करेगा। ज्योतिषाचार्य अमर डिब्बावाला के अनुसार, इस बार त्रिकोण योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो लगभग 19 वर्ष बाद (पिछली बार 2007) निर्मित हो रहा है।

चार प्रहर पूजा का विशेष महत्व

शिव महापुराण के अनुसार, महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की कृपा पाने के लिए चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है। यह पूजा प्रदोष काल से प्रारंभ होकर निशिथ काल (मध्यरात्रि) और ब्रह्म मुहूर्त तक संपन्न होती है। श्रद्धालु अपने संकल्प के अनुसार इसे एकल या सपरिवार कर सकते हैं। विभिन्न प्रहरों में पूजा करने से साधना और आराधना का विशेष शुभफल प्राप्त होता है।

ऐसे करें महाशिवरात्रि की शिव पूजा

  • स्नान के बाद पंचोपचार या षोडशोपचार विधि से पूजन करें।
  • व्रती अन्न ग्रहण न करें; क्रोध, लालच, नशा और अन्य बुराइयों से दूर रहें।
  • दिनभर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप शुभ माना जाता है।
  • पूजा उत्तर दिशा की ओर मुख करके करें; माथे पर चंदन/भस्म का त्रिपुंड लगाएं।
  • शिवलिंग पर पूर्व में चढ़ी सामग्री हटाकर बिल्वपत्र धोकर पुनः अर्पित किया जा सकता है।

महाशिवरात्रि और विवाह—भ्रम से परे तथ्य

महाशिवरात्रि शिव–पार्वती विवाह के कारण नहीं मनाई जाती। अखिल भारतीय पुजारी महासंघ विद्वत परिषद के विद्वान रूपेश मेहता के अनुसार, शिव महापुराण में महाशिवरात्रि को भगवान शिव की उत्पत्ति और ब्रह्मा–विष्णु के अहंकार के शमन से जोड़ा गया है। धार्मिक ग्रंथ स्पष्ट करते हैं कि शिव–पार्वती का विवाह फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी (महाशिवरात्रि) को नहीं हुआ था।

महाकालेश्वर मंदिर में तैयारियां तेज

  • 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर मंदिर में पर्व की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।
  • 6 फरवरी से मुख्य शिखर की धुलाई, परिसर का रंग-रोगन, कोटितीर्थ कुंड की सफाई और आसपास व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। मंदिर प्रांगण के 40 मंदिरों की पुताई अंतिम चरण में है।
  • दर्शन व्यवस्था को अंतिम रूप देने के लिए मंगलवार शाम कलेक्टर रोशन कुमार सिंह, मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक एवं समिति सदस्यों की बैठक प्रस्तावित है।

चार प्रहर पूजा से सिद्धि और सफलता

शिव महापुराण के अनुसार, प्रदोष से निशिथ और ब्रह्म मुहूर्त तक चार प्रहर में की गई पूजा से साधना में सिद्धि, कर्मों की शुद्धि और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button