बिहारराज्य

पारसनाथ पहाड़ विवाद पर सख्त रुख, सरकार से मांगा गया जवाब

पारसनाथ पहाड़ में अवैध खनन के आरोपों पर झारखंड हाईकोर्ट सख्त। जैन धर्म के पवित्र स्थल से जुड़ी जनहित याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा, अगली सुनवाई 12 फरवरी को।

रांची. झारखंड हाईकोर्ट ने जैन धर्म के प्रमुख धार्मिक स्थल गिरिडीह स्थित पारसनाथ पहाड़ को जैन धर्मावलंबियों की भावनाओं के अनुरूप संरक्षित रखने से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान प्रार्थी का पक्ष सुना।

इको-सेंसिटिव जोन में खनन पर मांगा जवाब

सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने पारसनाथ पहाड़, जिसे इको-सेंसिटिव जोन घोषित किया गया है, वहां कथित रूप से हो रहे खनन को लेकर राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई की तिथि 12 फरवरी निर्धारित की है।

डीएलएसए रिपोर्ट पर उठे सवाल

प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता खुशबू कटारूका ने अदालत को बताया कि गिरिडीह जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) की रिपोर्ट में पारसनाथ पहाड़ी क्षेत्र में चल रही माइनिंग गतिविधियों का कोई उल्लेख नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरा क्षेत्र इको-सेंसिटिव जोन घोषित है, जहां किसी भी प्रकार का खनन नहीं किया जा सकता, इसके बावजूद अवैध खनन जारी है, जिस पर तत्काल रोक आवश्यक है।

धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला

यह जनहित याचिका जैन संस्था ज्योत जैन संस्था की ओर से दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि पारसनाथ पहाड़ जैन धर्मावलंबियों का अत्यंत पवित्र धार्मिक स्थल है। इसके बावजूद वहां पिछले कई वर्षों से शराब और मांस की बिक्री, अतिक्रमण और पिकनिक जैसी गतिविधियां हो रही हैं, जो धार्मिक भावनाओं के विरुद्ध हैं।

केंद्र सरकार की अधिसूचना का हवाला

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पारसनाथ पहाड़ी क्षेत्र में कोई भी गतिविधि जैन धर्मावलंबियों की भावनाओं को ध्यान में रखकर ही की जानी चाहिए।

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