ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की एंट्री मजबूत, US कंपनियों से नई साझेदारी
भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद बड़ा संकेत। यूएसटीआर जैमिसन ग्रीर ने कहा— चीन से निकलने वाली अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत बन सकता है नया ठिकाना। जानें सप्लाई चेन, रूसी तेल और टैरिफ पर पूरा बयान।

नई दिल्ली. भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील के बाद एक और अहम संकेत सामने आया है। अमेरिका ने स्पष्ट कहा है कि चीन से बाहर निकलने वाली अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत एक मजबूत विकल्प बन सकता है। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमिसन ग्रीर ने एक इंटरव्यू में कहा कि भारत में बड़ी आबादी, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और संसाधन उपलब्ध हैं, जिससे यह सप्लाई चेन शिफ्ट के लिए उपयुक्त गंतव्य बन सकता है।
सप्लाई चेन शिफ्ट पर क्या बोले यूएसटीआर?
Fox News को दिए इंटरव्यू में ग्रीर से पूछा गया कि यदि अमेरिकी कंपनियां चीन से अपनी सप्लाई चेन हटाना चाहें तो क्या भारत सही विकल्प होगा? इस पर उन्होंने कहा कि कई कंपनियां पहले से ही इस दिशा में बढ़ रही हैं। अमेरिका चाहता है कि सप्लाई चेन घरेलू स्तर पर या निकटवर्ती देशों में हों, लेकिन वैश्वीकरण से अलग होने की प्रक्रिया में सप्लाई चेन को पुनर्स्थापित करना आवश्यक हो जाता है। उन्होंने कहा, “भारत इसके लिए एक अच्छा रास्ता हो सकता है। वहां पर्याप्त जनशक्ति और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मौजूद है।”
भारत बन सकता है नया बिजनेस हब
ग्रीर ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका की प्राथमिकता अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग और अमेरिकी श्रमिक हैं। हालांकि, जहां आयात की आवश्यकता होगी, वहां भारत एक भरोसेमंद और संतुलित व्यापारिक साझेदार बन सकता है।
भारत की युवा आबादी, बढ़ता औद्योगिक आधार, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकार की नीतियां इसे वैश्विक कंपनियों के लिए आकर्षक बनाती हैं। पहले से ही कई बड़ी अमेरिकी कंपनियां भारत में निवेश बढ़ा रही हैं, जिनमें —
- Apple
- Amazon
- Tesla शामिल हैं।
क्या भारत रूसी तेल की खरीद घटा रहा है?
ग्रीर ने यह भी कहा कि भारत ने रूसी ऊर्जा उत्पादों की खरीद धीरे-धीरे कम करना शुरू कर दिया है और अमेरिका समेत अन्य स्रोतों से ऊर्जा आयात बढ़ा रहा है।
उन्होंने कहा, “संक्षिप्त उत्तर हां है। भारत ने रूसी ऊर्जा की खरीद कम करनी शुरू कर दी है और अन्य विकल्पों की ओर रुख किया है।”
भारत-अमेरिका ट्रेड डील और टैरिफ में राहत
भारत और अमेरिका ने अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति जताई है, जिसके तहत कई वस्तुओं पर आयात शुल्क में कटौती की जाएगी। ट्रेड डील के बाद अमेरिका ने भारत पर टैरिफ घटाकर 18% कर दिया है और अतिरिक्त टैरिफ भी हटाने की घोषणा की है।
इससे भारत को अमेरिकी बाजार में निर्यात बढ़ाने का अवसर मिलेगा, रोजगार सृजन होगा और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को बढ़ावा मिलेगा। वहीं, अमेरिका को एक सुरक्षित और भरोसेमंद सप्लाई चेन विकल्प मिलेगा, जिससे चीन पर निर्भरता कम होगी।




