₹22 लाख करोड़ का मौका: India-EU डील से भारतीय स्टॉक्स को नई रफ्तार
India-EU FTA को मंजूरी मिलने से भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर को बड़ा फायदा। जीरो टैरिफ एक्सपोर्ट, 263 अरब डॉलर के EU बाजार तक आसान पहुंच और कई शेयरों में तेजी की उम्मीद।

नई दिल्ली. भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से चर्चित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (India-EU FTA) को मंगलवार को औपचारिक रूप से अंतिम रूप दे दिया गया। इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है, क्योंकि इससे भारतीय अर्थव्यवस्था के कई सेक्टरों को व्यापक लाभ मिलने की संभावना है। खासतौर पर टेक्सटाइल और परिधान उद्योग को इस डील का सबसे बड़ा लाभार्थी माना जा रहा है।
समझौते के तहत भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय संघ के देशों में जीरो टैरिफ एक्सपोर्ट की सुविधा मिलेगी। उल्लेखनीय है कि यूरोपीय संघ का कपड़ा बाजार करीब 263.5 अरब डॉलर (22 लाख करोड़ रुपये से अधिक) का है, जो भारतीय कंपनियों के लिए एक विशाल अवसर खोलता है।
FTA से टैरिफ-फ्री निर्यात का रास्ता
India-EU FTA के तहत कपड़ा और परिधान सेक्टर में भारत को शून्य शुल्क पर एंट्री मिलेगी। अब तक यूरोपीय देशों में भारतीय वस्त्रों पर 9 से 12 प्रतिशत तक टैरिफ लगता था, जिसे इस समझौते के तहत या तो पूरी तरह खत्म किया जाएगा या 2–3 प्रतिशत तक सीमित किया जाएगा। इससे भारतीय निर्यातकों की लागत घटेगी और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
अमेरिका के बाद EU दूसरा सबसे बड़ा बाजार
अमेरिका के बाद यूरोपीय संघ भारत के टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। वर्ष 2024 में इस सेक्टर में EU का वैश्विक आयात 263.5 अरब डॉलर रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि जीरो टैरिफ एंट्री से भारत के निर्यात और रोजगार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी, वहीं यह वैश्विक व्यापार संतुलन के लिहाज से अमेरिका के लिए भी एक रणनीतिक झटका माना जा रहा है।
भारत कितना कपड़ा करता है निर्यात
भारत हर साल वैश्विक स्तर पर करीब 36.7 अरब डॉलर (3.19 लाख करोड़ रुपये) के कपड़ा और परिधान उत्पादों का निर्यात करता है। इसमें से लगभग 62.7 हजार करोड़ रुपये का निर्यात अकेले यूरोपीय संघ को किया जाता है। FTA के बाद सूत, कपास, मानव-निर्मित फाइबर (MMF), रेडीमेड गारमेंट्स और होम टेक्सटाइल्स के निर्यात में तेज उछाल की उम्मीद है।
इन शेयरों में आ सकती है तेजी
India-EU ट्रेड डील के ऐलान के बाद शेयर बाजार में भी सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। ब्रोकरेज फर्म एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग के मुताबिक, यह समझौता मैन्युफैक्चरिंग, रोजगार और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को बढ़ावा देगा।
- केमिकल सेक्टर: PI इंडस्ट्रीज, रैलीस इंडिया, SRF लिमिटेड, सुमितोमो केमिकल इंडिया, UPL
- हाउस मैटेरियल: ग्रीनलाम इंडस्ट्रीज, ग्रीनपैनल इंडस्ट्रीज
- इंडस्ट्रियल सेक्टर: ABB India, अपार इंडस्ट्रीज, GE Vernova T&D, Hitachi Energy, Siemens Energy India
- आईटी सेक्टर: HCL Tech, कोफोर्ज, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज
- मेटल और माइनिंग: वेदांता
- फार्मा: सिप्ला, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, टॉरेंट फार्मास्यूटिकल्स
- टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स: KPR मिल, वेलस्पन लिविंग
MSME और रोजगार को मिलेगा बल
इस समझौते से लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को यूरोप के बड़े बाजार में आसान पहुंच मिलेगी। इससे न केवल उत्पादन और निर्यात बढ़ेगा, बल्कि भारत को एक भरोसेमंद ग्लोबल सप्लाई पार्टनर के रूप में स्थापित करने में भी मदद मिलेगी।
4 करोड़ लोगों को रोजगार देता है टेक्सटाइल सेक्टर
भारत-EU FTA से बांग्लादेश, पाकिस्तान और तुर्की जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले भारत की टैरिफ असमानता खत्म होगी। वर्तमान में EU को भारत के टेक्सटाइल निर्यात में रेडीमेड गारमेंट्स का हिस्सा करीब 60 प्रतिशत है। भारत का टेक्सटाइल उद्योग प्रत्यक्ष रूप से लगभग 4 करोड़ लोगों को रोजगार देता है, ऐसे में इस डील का सामाजिक-आर्थिक असर भी बड़ा माना जा रहा है।
भारतीय निर्यात को बड़ा लाभ
एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग के अनुसार, तत्काल शुल्क हटने से लगभग 33 अरब डॉलर के भारतीय निर्यात को फायदा होगा। टेक्सटाइल पर 12 प्रतिशत तक का टैरिफ शून्य हो जाएगा। चमड़ा और जूते पर 17 प्रतिशत तक के शुल्क समाप्त होने से तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश के विनिर्माण क्लस्टर्स को सीधा लाभ मिलेगा। वहीं, रत्न-आभूषणों पर 4 प्रतिशत तक का शुल्क हटने से अगले तीन वर्षों में इस सेक्टर का व्यापार दोगुना होकर 10 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।




