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वैश्विक मंच पर भारत: दावोस में विशेषज्ञों का दावा—भारत का आर्थिक युग शुरू

दावोस वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भारत की मजबूत मौजूदगी, सुधारों की रफ्तार, प्रदूषण व श्रम बाजार की चुनौतियां और 2047 के विकसित भारत की राह पर दिग्गजों की राय।

नई दिल्ली. दुनिया के चुनिंदा देशों में भारत इस वर्ष दावोस में आयोजित World Economic Forum में सबसे अधिक आत्मविश्वास और मजबूती के साथ उपस्थित हुआ। मजबूत आर्थिक वृद्धि, गहरे संरचनात्मक सुधार और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी के बीच भारत आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। हालांकि, इस गति को बनाए रखने के लिए अब कड़े नीतिगत फैसलों और तेज़ व प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता है।

इसी संदर्भ में India Today Group के सहयोग से दावोस में एक विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसका संचालन इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस-चेयरपर्सन और एग्जीक्यूटिव एडिटर-इन-चीफ Kalli Purie ने किया। सत्र में दिग्गज अर्थशास्त्रियों, वैश्विक सीईओ और केंद्रीय मंत्रियों ने भारत की मौजूदा स्थिति और भविष्य की दिशा पर विस्तार से चर्चा की।

भारत का ‘मोमेंटम मोमेंट’

चर्चा की शुरुआत हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र की प्रोफेसर और प्रसिद्ध भारतीय-अमेरिकी अर्थशास्त्री Gita Gopinath ने की।
उन्होंने भारत की आर्थिक उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा— “भारत का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर अत्यंत प्रभावशाली है। जीएसटी में किए गए सुधार, विशेषकर हालिया सरलीकरण, अर्थव्यवस्था के लिए बेहद सहायक सिद्ध हुए हैं।”

जब उनसे पूछा गया कि इस मोमेंटम को कैसे बनाए रखा जाए, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा— “प्रति व्यक्ति आय बढ़ाना और 2047 के ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य तक पहुंचना अब असली चुनौती है। भारत की बुनियाद मजबूत है—विकास दर ऊंची है और महंगाई लो सिंगल डिजिट में बनी हुई है।” हालांकि, उन्होंने भूमि अधिग्रहण, स्पष्ट भूमि स्वामित्व और न्यायिक सुधारों को अब भी बड़ी बाधा बताया।

श्रम बाजार और स्किलिंग की चुनौती

गीता गोपीनाथ ने श्रम बाजार की संरचनात्मक कमजोरियों की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि भारत की जनसांख्यिकीय क्षमता का पूरा लाभ नहीं उठाया जा पा रहा है और कुल आर्थिक वृद्धि में श्रम का योगदान लगभग 30 प्रतिशत तक सीमित है।

उन्होंने नए श्रम कानूनों का स्वागत करते हुए कहा— “यदि भारत को वैश्विक सप्लाई चेन से मजबूती से जुड़ना है, तो बड़े पैमाने पर स्किलिंग की आवश्यकता होगी। नौकरियों और कौशल के बीच की खाई अभी बहुत बड़ी है।”

प्रदूषण: विकास की राह में गंभीर बाधा

भूमि और श्रम के अलावा सबसे बड़ी चुनौती पर बोलते हुए गोपीनाथ ने प्रदूषण को रेखांकित किया। उन्होंने कहा— “प्रदूषण भारत के लिए टैरिफ से भी बड़ी समस्या है। विश्व बैंक के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 17 लाख लोगों की मौत प्रदूषण के कारण होती है। यह न केवल आर्थिक बोझ है, बल्कि निवेशकों को भी हतोत्साहित करता है।” उन्होंने प्रदूषण से युद्ध स्तर पर निपटने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

वैश्विक अनिश्चितताएं और बदलती आर्थिक व्यवस्था

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की टैरिफ नीतियों और वैश्विक अस्थिरता पर बोलते हुए गोपीनाथ ने कहा— “दुनिया पिछले 80 वर्षों के वैश्विक आर्थिक ढांचे से आगे निकल चुकी है। अब पीछे लौटने का रास्ता नहीं है।”

अभी भी बाकी हैं बड़े सुधार: सुनील मित्तल

इसके बाद चर्चा में शामिल हुए भारती एंटरप्राइजेज के चेयरमैन Sunil Bharti Mittal। उन्होंने कहा— “भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा ही। हमें 25–30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए बड़े पैमाने पर सोचने और काम करने की जरूरत है।”

उन्होंने नीति स्थिरता, सक्षम सरकार और अनुकूल कारोबारी माहौल को आज की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया और ट्रेड डील्स को भविष्य के लिए निर्णायक करार दिया।

भारत: उपभोक्ताओं का नहीं, उत्पादन का भी महाद्वीप

मित्तल ने कहा— “भारत आज केवल उपभोक्ताओं का महाद्वीप नहीं है, बल्कि हम दुनिया के लिए उत्पादन भी कर रहे हैं।” उन्होंने सरकार से भारतीय कंपनियों पर और अधिक भरोसा दिखाने की अपील की।

एक वैश्विक CEO की नजर से भारत

IKEA के वैश्विक प्रमुख Jesper Brodin ने भारत को लेकर भावनात्मक जुड़ाव जताया।  उन्होंने कहा— “भारत एक विशाल बाजार है, युवा आबादी वाला लोकतंत्र है और इसमें यह क्षमता है कि वह कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था से सीधे AI युग में छलांग लगा सकता है।” उन्होंने विदेशी निवेशकों को भारत में दीर्घकालिक सोच के साथ आने की सलाह दी।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में ऐतिहासिक सुधार

सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री Ashwini Vaishnaw ने सुधारों का विस्तृत विवरण साझा किया। उन्होंने बताया—

  • 10 वर्षों में 1,600 पुराने कानून समाप्त
  • 35,000 से अधिक अनुपालनों को हटाया गया
  • टेलीकॉम टावर की अनुमति: 270 दिन से घटकर 7 दिन
  • रेलवे टर्मिनल निर्माण: 6 साल से घटकर ढाई महीने
  • उन्होंने कहा कि 1800 के दशक के कानूनों को आधुनिक फ्रेमवर्क से बदला गया है।

टैरिफ़ की चुनौती और भारत की रणनीति

वैश्विक टैरिफ दबावों पर वैष्णव ने कहा— “भारत एक लचीली और मजबूत अर्थव्यवस्था है। टैरिफ के बावजूद हमारे निर्यात बढ़े हैं।” उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स अब भारत का तीसरा सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र बन चुका है और भारत नए भौगोलिक क्षेत्रों में व्यापार का विस्तार कर रहा है।

2026 से 2047 तक का सफर

पैनल चर्चा ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत के सामने अवसर भी वास्तविक हैं और चुनौतियां भी स्पष्ट हैं। अब यह इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत 2026 के वादों को 2047 की हकीकत में कैसे बदलता है। सत्र के समापन पर कली पुरी ने कहा— “भारत दुनिया के लिए एक सकारात्मक शक्ति है और इसका भविष्य बेहद उज्ज्वल है।”

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