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जियो-स्ट्रैटेजिक गेमचेंजर! चिकन नेक में 40 KM अंडरग्राउंड लिंक

चिकन नेक (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार का बड़ा कदम। 40 किमी लंबी अंडरग्राउंड रेलवे टनल से नॉर्थ-ईस्ट और शेष भारत की कनेक्टिविटी होगी और मजबूत।

नई दिल्ली. भारत को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाली सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील पट्टी ‘चिकन नेक’ (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। अब जमीन के ऊपर ही नहीं, बल्कि जमीन के नीचे से भी इस अहम कॉरिडोर को सुरक्षित रखने की योजना पर काम शुरू हो गया है। इसके तहत चिकन नेक से होकर 40 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड रेलवे टनल बनाई जाएगी।

केंद्रीय रेल मंत्री ने दी जानकारी

सोमवार को केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार नॉर्थ-ईस्ट को शेष भारत से जोड़ने वाले एक स्ट्रेटेजिक कॉरिडोर पर अंडरग्राउंड रेल ट्रैक विकसित करने की योजना बना रही है, जिससे कनेक्टिविटी ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद हो सके।

कहां से कहां तक बनेगी अंडरग्राउंड टनल

प्रस्तावित अंडरग्राउंड रेलवे सेक्शन तीन मील हाट (Tin Mile Haat) और रंगापानी रेलवे स्टेशन के बीच सिलीगुड़ी कॉरिडोर में बनेगा। यही इलाका आमतौर पर ‘चिकन नेक’ के नाम से जाना जाता है। यह कॉरिडोर अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा—इन आठ पूर्वोत्तर राज्यों को शेष भारत से जोड़ता है।

क्यों है ‘चिकन नेक’ इतना संवेदनशील

करीब 60 किलोमीटर लंबा और मात्र 20 किलोमीटर चौड़ा यह क्षेत्र नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाओं से सटा हुआ है। भौगोलिक स्थिति और सामरिक महत्व के कारण इसे लंबे समय से राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील माना जाता रहा है। यहां रेलवे लाइनें, राष्ट्रीय राजमार्ग, तेल पाइपलाइन और संचार नेटवर्क मौजूद हैं, जिससे यह देश के सबसे व्यस्त और रणनीतिक ट्रांजिट ज़ोन में शामिल है।

बजट आवंटन और चार-लाइन ट्रैक की योजना

रेलवे बजट पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए मीडिया से बात करते हुए अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस 40 किमी स्ट्रेटेजिक कॉरिडोर के लिए विशेष प्लानिंग की गई है। अंडरग्राउंड ट्रैक के साथ-साथ मौजूदा रेलवे लाइन को चार-लाइन करने की भी तैयारी चल रही है, ताकि भविष्य की जरूरतों को पूरा किया जा सके।

डिफेंस और लॉजिस्टिक्स के लिहाज से अहम

अंडरग्राउंड रेलवे परियोजना भारतीय रेलवे की लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजी का हिस्सा है। इसका उद्देश्य यात्रियों के साथ-साथ सामान और डिफेंस लॉजिस्टिक्स की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना है, जिससे किसी भी आपात स्थिति में सप्लाई लाइन बाधित न हो।

नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे की राय

इस परियोजना को लेकर नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) के जनरल मैनेजर चेतन कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि पश्चिम बंगाल में तीन मील हाट–रंगापानी सेक्शन पर प्रस्तावित अंडरग्राउंड रेलवे लाइन सुरक्षा के नजरिए से बेहद जरूरी है। उन्होंने ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत पर जोर दिया जो प्राकृतिक और मानव-जनित दोनों तरह की चुनौतियों का सामना कर सके।

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