यूनुस सरकार का यू-टर्न? भारत-बांग्लादेश समीकरण पर विशेषज्ञों की नजर
भारत-बांग्लादेश रिश्तों में तनाव पर पूर्व राजनयिक सुरेंद्र कुमार का बड़ा बयान। यूनुस सरकार के रवैये को बताया निराशाजनक, पाकिस्तान से नजदीकी पर जताई हैरानी और बांग्लादेश को दी चेतावनी।

नई दिल्ली. भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में बढ़ते तनाव के बीच बांग्लादेश की अंतरिम यूनुस सरकार के रवैये ने कूटनीतिक विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है। भारत के पूर्व राजनयिक सुरेंद्र कुमार ने कहा है कि भारत के प्रति बांग्लादेश का मौजूदा रवैया बेहद निराशाजनक और दुखद है। उनका कहना है कि बांग्लादेश अपने अस्तित्व में भारत की भूमिका को भूल चुका है।
“भारत के बिना बांग्लादेश का अस्तित्व नहीं”
पूर्व राजनयिक सुरेंद्र कुमार ने कहा, “यह बहुत निराशाजनक है। बांग्लादेश, जिसके लिए भारत ने इतना कुछ किया। भारत के बिना बांग्लादेश नहीं था। यहां तक कि खालिदा जिया के बेटे ने भी रिकॉर्ड पर कहा है कि 1971 में जो हुआ, उसे हम नहीं भूल सकते। लेकिन मौजूदा सरकार के मुख्य सलाहकार का अपना तरीका है।” उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के व्यवहार के बावजूद भारत ने संयम और धैर्य बनाए रखा है, जो सराहनीय है।
‘पाक के जख्मों को इतनी जल्दी कैसे भूला दिया?’
सुरेंद्र कुमार ने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि बांग्लादेश ने पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर रुख कैसे बदल लिया।
उन्होंने कहा, “यह वही पाकिस्तान है जिसकी सेना ने 1971 में जनरल जिया के नेतृत्व में लगभग 30 लाख लोगों की हत्या की और करीब 3 लाख महिलाओं के साथ अत्याचार किए। इन जख्मों को इतनी जल्दी भुला देना समझदारी नहीं है।”
बांग्लादेश को आगाह: भारत से रिश्ते जरूरी
पूर्व राजनयिक ने बांग्लादेश को साफ शब्दों में आगाह करते हुए कहा कि यदि वह प्रगति करना चाहता है, तो उसे भारत के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने होंगे। उन्होंने कहा, “आप भारत के साथ अच्छे रिश्ते रखना चाहते हैं, लेकिन यह तरीका सही नहीं है। भारत से बिजली सप्लाई हो रही है, बॉर्डर एग्रीमेंट साइन हुआ है और पानी साझा करने की व्यवस्था भी चल रही है। इस तरह की कार्रवाई लंबे समय में बांग्लादेश के हित में नहीं है।”
चुनाव के बाद बदलेगा रुख?
सुरेंद्र कुमार ने उम्मीद जताई कि बांग्लादेश में जब चुनाव होंगे और जो भी सरकार सत्ता में आएगी, उसे यह समझ आएगा कि उसका लॉन्ग-टर्म हित भारत के साथ मजबूत और सकारात्मक रिश्तों में ही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हालिया समय में मालदीव जैसे देशों ने भी यह महसूस किया है कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भारत के साथ संतुलित संबंध जरूरी हैं।




