डोडा की पहाड़ियों में शहादत, ग्वालियर के सपूत के आखिरी शब्द बन गए अमर स्मृति
डोडा जिले में हुए सेना बस हादसे में ग्वालियर के जवान शैलेंद्र सिंह भदौरिया बलिदान हो गए। 2007 में भर्ती, 4-आरआर यूनिट में हवलदार थे। शुक्रवार को ग्वालियर में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई।

ग्वालियर. शहर के वीर सपूत शैलेंद्र सिंह भदौरिया देश की रक्षा करते हुए जम्मू-कश्मीर में बलिदान हो गए। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में भद्रवाह–चांबा मार्ग पर स्थित खानी टाप क्षेत्र में सेना की बुलेटप्रूफ बस गहरी खाई में गिर गई। इस दर्दनाक हादसे में कुल 10 जवान बलिदान हुए, जिनमें हवलदार शैलेंद्र सिंह भदौरिया भी शामिल थे।
हादसे से पहले परिवार से हुई थी आखिरी बातचीत
हादसे से ठीक पहले रात में शैलेंद्र सिंह भदौरिया ने फोन पर पत्नी शिवानी और बेटे भावेश से बात की थी। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा था—“ख्याल रखना, मैं ऊंचाई पर जा रहा हूं।” नेटवर्क समस्या के कारण वीडियो कॉल पूरी नहीं हो सकी और कुछ देर बाद फोन कट गया। इसके बाद गुरुवार दोपहर उनकी यूनिट से बलिदान की सूचना स्वजनों को दी गई।
शुक्रवार को ग्वालियर पहुंचेगा पार्थिव शरीर
बलिदानी जवान का पार्थिव शरीर सेना द्वारा ग्वालियर लाया जा रहा है, जो शुक्रवार को पहुंचेगा। ग्वालियर में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी। इस अवसर पर सेना और स्थानीय पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे।
2007 में सेना में भर्ती, 4-आरआर यूनिट में थे पदस्थ
शैलेंद्र सिंह भदौरिया, पिता हनुमंत सिंह भदौरिया, मूल रूप से भिंड जिले के निवासी थे। वर्ष 2007 में वे भारतीय सेना में भर्ती हुए थे और वर्तमान में 4-आरआर यूनिट में हवलदार के पद पर पदस्थ थे। ग्वालियर के गोला का मंदिर स्थित पिंटो पार्क क्षेत्र की प्रीतम विहार कॉलोनी में उनका परिवार निवास करता है, जहां पिता, दो भाई, पत्नी और तीन बच्चे रहते हैं।
शोक में डूबा परिवार, गमगीन हुआ शहर
बलिदान की खबर मिलते ही ग्वालियर स्थित उनके घर पर रिश्तेदार, परिचित और सेना के अधिकारी पहुंचने लगे। पत्नी शिवानी बेसुध हो गईं। छह वर्षीय बेटा भावेश और बेटियां अक्षिता व राधिका का रो-रोकर बुरा हाल है। शैलेंद्र तीन भाइयों में मझले थे। शहर और क्षेत्र में शोक की लहर है।




