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2025 का ट्रेंड: जेब पर भारी पड़ा सोना, रिटर्न में आगे निकली चांदी

पिछले एक साल में सोना 81% और चांदी 167% चढ़ी। वैश्विक तनाव, निवेश मांग और केंद्रीय बैंकों की खरीद से रिकॉर्ड तेजी, आम उपभोक्ता दूर और निवेशकों-सर्राफा कारोबारियों को भारी मुनाफा।

नई दिल्ली. वैश्विक भू-राजनैतिक तनाव और व्यापारिक अनिश्चितताओं के बीच पिछले एक साल में सोना और चांदी निवेशकों के लिए सुपरहिट साबित हुए हैं। जहां एक ओर इन कीमती धातुओं की रिकॉर्ड तेजी ने आम उपभोक्ताओं को बाजार से दूर कर दिया, वहीं निवेशकों और सर्राफा कारोबारियों को भारी मुनाफा हुआ है।

एक साल में सोना-चांदी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड

एमसीएक्स इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक, अहमदाबाद में सोने की कीमत 31 दिसंबर 2024 को 75,913 रुपये प्रति 10 ग्राम थी, जो 26 दिसंबर 2025 तक बढ़कर 1,37,591 रुपये पर पहुंच गई। इस तरह सोने ने एक साल में 81 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न दिया।

वहीं चांदी की कीमत 85,851 रुपये प्रति किलोग्राम से उछलकर 2,28,948 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। यानी चांदी में 167 प्रतिशत की जबरदस्त तेजी दर्ज की गई।

वैश्विक तनाव बना तेजी की बड़ी वजह

विशेषज्ञों के अनुसार, सोने-चांदी की कीमतों में इस उछाल के पीछे मुख्य कारण वैश्विक हालात हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में सोने की ओर रुख किया। इसके अलावा, वैश्विक व्यापार तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं ने भी पीली धातु की मांग को मजबूत किया है। निवेशकों के साथ-साथ दुनिया के कई केंद्रीय बैंक भी सोने की खरीद बढ़ा रहे हैं।

कीमत बढ़ी, लेकिन खपत घटी

जहां मूल्य के लिहाज से सोने की मांग बढ़ी है, वहीं वास्तविक खपत में गिरावट आई है। ऊंची कीमतों के कारण सोना आम लोगों की पहुंच से बाहर होता जा रहा है। खासतौर पर वैवाहिक और आभूषण खरीद में कमी देखी जा रही है।

त्योहारी-शादी की मांग भी जिम्मेदार

ऑल इंडिया जेम एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) के मुताबिक, वैश्विक कारकों के साथ-साथ देश में वैवाहिक और त्योहारी मांग ने भी सोने-चांदी की कीमतों को सहारा दिया है। परिषद का कहना है कि ऊंची कीमतों के बावजूद निवेश मांग बनी हुई है और नए साल में भी तेजी जारी रहने की संभावना है।

रणनीतिक संपत्ति हैं कीमती धातुएं

GJC के चेयरमैन राजेश रोकड़े ने कहा कि साल 2025 ने एक बार फिर साबित किया है कि कीमती धातुएं रणनीतिक संपत्ति हैं।
उनके अनुसार, सोने की ऐतिहासिक तेजी भारतीय परिवारों के पीढ़ियों पुराने भरोसे को प्रमाणित करती है, जबकि सौर उपकरणों, नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों में बढ़ती खपत के कारण चांदी की मांग में तेज उछाल देखने को मिल रहा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी जबरदस्त तेजी

वैश्विक स्तर पर लंदन बुलियन मार्केट में इस साल सोना 70.7 प्रतिशत चढ़कर 4,482 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया। चांदी भी 135 प्रतिशत की तेजी के साथ 69.22 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती रही। विदेशी बाजारों की मजबूती और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने घरेलू कीमतों को और ऊंचा किया।

निवेश मांग सबसे बड़ा सहारा

विश्व स्वर्ण परिषद के मुताबिक, पिछले एक साल में सोना 60 प्रतिशत से ज्यादा महंगा हुआ है, जो कई दशकों में इसका सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है। इसके पीछे मुख्य वजह निवेश मांग और केंद्रीय बैंकों की मजबूत खरीद है। कमजोर अमेरिकी डॉलर ने भी सोने को समर्थन दिया है।

आरबीआई: सोना अब भी सबसे सुरक्षित

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की दिसंबर की मासिक रिपोर्ट में कहा गया है कि सोना सुरक्षित निवेश के रूप में अपनी उपयोगिता बनाए हुए है और मूल्य के लिहाज से यह सबसे स्थिर कमोडिटी है। चांदी अपेक्षाकृत अधिक अस्थिर होने के बावजूद सुरक्षित निवेश के गुण रखती है।

शादी-ब्याह में सोना कम, सिक्कों में निवेश ज्यादा

ऊंची कीमतों के चलते वैवाहिक मांग में कमी आई है। उपभोक्ता अब या तो कम वजन के गहने खरीद रहे हैं या कम कैरेट के आभूषणों को तरजीह दे रहे हैं। विश्व स्वर्ण परिषद का अनुमान है कि भारत में सोने की कुल मांग इस साल करीब 12 प्रतिशत घट सकती है, जबकि बिस्कुट और सिक्कों की मांग में इजाफा हुआ है।

सर्राफा कारोबारियों की चांदी

निवेशकों के साथ-साथ सर्राफा कारोबारी और ज्वेलरी शो-रूम चेन भी इस तेजी से लाभ में हैं। चूंकि मेकिंग चार्ज प्रतिशत के आधार पर लिया जाता है, इसलिए सोना-चांदी जितनी महंगी होती जा रही है, कारोबारियों का शुद्ध मुनाफा उतना ही बढ़ रहा है।

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