दिल्ली

बढ़ते प्रदूषण पर आशीष सूद का बयान— मौसम के आगे बेबस है दिल्ली सरकार

दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद ने कहा कि वायु प्रदूषण पुरानी समस्या है और मौसम पर दिल्ली सरकार का कोई नियंत्रण नहीं। उन्होंने AQI स्टेशनों, CAG रिपोर्ट, ऑड-ईवन योजना और सार्वजनिक परिवहन पर विपक्ष को घेरा।

नई दिल्ली. दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष के प्रदूषण संबंधी आरोपों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने स्पष्ट कहा कि दिल्ली का वायु प्रदूषण न तो मौसमी समस्या है और न ही पिछले 10 महीनों में पैदा हुआ संकट। यह वर्षों पुरानी समस्या है, जिसका बड़ा कारण आसपास के राज्यों से आने वाला प्रदूषण है। उन्होंने कहा कि मौसम पर दिल्ली सरकार का कोई नियंत्रण नहीं होता।

‘हर मुद्दे पर एक्सपर्ट बनने वाले बेरोजगार नेता’

आशीष सूद ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि हाल के दिनों में कुछ “बेरोजगार नेता” सरकार पर आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा, “ये लोग कभी ईवीएम एक्सपर्ट बन जाते हैं, कभी कोयला, कभी बिजली और कभी न्यूक्लियर पावर के। अब ये आरोप लगा रहे हैं कि दिल्ली सरकार ने जानबूझकर हरे-भरे इलाकों में AQI मीटर लगाए ताकि प्रदूषण कम दिखे।”

2017-18 में जोड़े गए 20 नए AQI स्टेशन

गृह मंत्री ने बताया कि वर्ष 2017-18 में 20 नए एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन जोड़े गए थे। इनमें जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम, असोला वन्यजीव अभयारण्य, अलीपुर का ग्रामीण क्षेत्र, नेहरू नगर का कॉलेज कैंपस और नजफगढ़ जैसे अपेक्षाकृत हरे-भरे इलाके शामिल थे।
उन्होंने कहा कि इन स्टेशनों में से लगभग 30 प्रतिशत स्टेशन हरित क्षेत्रों में लगाए गए थे।

CAG रिपोर्ट ने AQI डेटा की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल

  • सूद ने कहा कि सीएजी (CAG) रिपोर्ट के अनुसार कई एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों की लोकेशन केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मानकों पर खरी नहीं उतरती।
  • इससे AQI डेटा में त्रुटियां हो सकती हैं और आंकड़े अविश्वसनीय बन जाते हैं।
  • उन्होंने आरोप लगाया, “पुरानी सरकार ने हवा साफ करने के बजाय आंकड़े साफ करने की कोशिश की।”

ऑड-ईवन और ‘रेड लाइट पर इंजन बंद’ पर तंज

  • गृह मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने भी दिल्ली सरकार को ऑड-ईवन योजना को लेकर फटकार लगाई थी।
  • एनजीटी ने टिप्पणी की थी, “आपके पास 100 सुझाव हैं, लेकिन आप हर बार ऑड-ईवन ही चुनते हैं।”
  • इसके बाद सरकार ने एक और ‘क्रांतिकारी’ कदम उठाया—रेड लाइट पर इंजन बंद करने की मुहिम।

प्रदूषण नियंत्रण को पीआर इवेंट बनाने का आरोप

आशीष सूद ने कहा कि आलोचकों का मानना है कि दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण को हमेशा एक पीआर अभियान की तरह इस्तेमाल किया गया, ताकि राजनीतिक जमीन मजबूत की जा सके। उन्होंने कहा, “जिस हवा में हमारे बच्चे सांस लेते हैं, उसका राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए।”

सार्वजनिक परिवहन और कचरा प्रबंधन पर सवाल

गृह मंत्री ने कहा कि अगर नीयत सही होती तो दिल्ली सरकार सार्वजनिक परिवहन, कचरा प्रबंधन और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी पर गंभीरता से काम करती। उन्होंने कहा कि अगर धूल को प्रदूषण का बड़ा कारण माना जाता है, तो शहर में पर्याप्त स्वीपिंग मशीनें लगाई जानी चाहिए थीं, लेकिन इस दिशा में ठोस प्रयास नहीं हुए।

केंद्र की परियोजनाओं में बाधा डालने का आरोप

सूद ने आरोप लगाया कि इसके उलट, केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन सुधार के लिए चलाई जा रही परियोजनाओं—जैसे आरआरटीएस (RRTS) और डीएमआरसी मेट्रो के नए फेज—में लगातार बाधाएं खड़ी की गईं।

उन्होंने कहा, “सार्वजनिक परिवहन सुधार के लिए पैसे नहीं थे, लेकिन विज्ञापनों के लिए धन की कोई कमी नहीं थी। यह आरोप मेरा नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी है।”

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