कानूनी पेंच ने रोका छत्तीसगढ़ का मतांतरण विरोधी विधेयक, बजट सत्र में उम्मीद धुंधली
छत्तीसगढ़ में कड़े मतांतरण विरोधी कानून पर सुप्रीम कोर्ट की कानूनी अड़चन, बजट सत्र में विधेयक पेश होने की संभावना कमजोर, प्रस्तावित कानून में 10 साल की सजा का प्रावधान।

रायपुर. छत्तीसगढ़ में विष्णु देव साय सरकार द्वारा प्रस्तावित कड़े मतांतरण विरोधी कानून के रास्ते में फिलहाल कानूनी अड़चनें खड़ी होती नजर आ रही हैं। शीतकालीन सत्र में विधेयक लाने की घोषणा के बावजूद अब 23 फरवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र में भी इसके पेश होने की संभावना कम आंकी जा रही है। कारण—देशभर में लागू मतांतरण विरोधी कानूनों की संवैधानिक वैधता को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामला बना बड़ी बाधा
दरअसल, विभिन्न राज्यों में लागू मतांतरण विरोधी कानूनों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इस मामले में छत्तीसगढ़ के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, झारखंड और राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा गया है।
अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 3 फरवरी तय की है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि जब मूल कानून की वैधता ही न्यायिक जांच के दायरे में है, तो राज्य सरकार नए संशोधन विधेयक को लेकर अत्यधिक सतर्कता बरत रही है।
प्रस्तावित नया कानून: सजा और जुर्माने होंगे सख्त
सूत्रों के अनुसार साय सरकार जिस नए विधेयक पर काम कर रही है, वह छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 का स्थान लेगा। प्रस्तावित कानून में कड़े दंडात्मक प्रावधान शामिल किए जाने की तैयारी है—
- प्रलोभन या जबरन मतांतरण पर 10 साल तक की सजा
- मतांतरण से 60 दिन पूर्व जिला प्रशासन को सूचना देना अनिवार्य
- वर्तमान में 5,000 रुपये के जुर्माने को कई गुना बढ़ाने का प्रस्ताव
- जबरन मतांतरण और प्रलोभन की परिभाषा को अधिक व्यापक बनाने की योजना
- राज्य सरकार का तर्क है कि नए कानून से अवैध और जबरन मतांतरण की गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
बस्तर और सरगुजा में बढ़ी शिकायतें
अनुमान के मुताबिक पिछले दो वर्षों में छत्तीसगढ़ में मतांतरण से जुड़ी 100 से अधिक शिकायतें दर्ज की गई हैं। हिंदू संगठनों का आरोप है कि विशेष रूप से आदिवासी बहुल क्षेत्रों—बस्तर और सरगुजा—में भोले-भाले ग्रामीणों को निशाना बनाया जा रहा है।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि इस विषय पर मंत्रिमंडलीय उप-समिति कार्य कर रही है, हालांकि विधेयक पेश करने की संभावित तिथि को लेकर उन्होंने कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की।
हालिया घटनाएं: राज्य में बढ़ता तनाव
केस 01: राजनांदगांव में प्रार्थना सभा पर हंगामा: 1 फरवरी 2026 को राजनांदगांव के मोतीपुर में एक घर में चल रही ईसाई प्रार्थना सभा को लेकर हिंदूवादी संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। आरोप था कि वहां मतांतरण कराया जा रहा है। पुलिस हस्तक्षेप के बाद स्थिति नियंत्रित हुई।
केस 02: सेवानिवृत्त डिप्टी कलेक्टर की गिरफ्तारी: 29 जनवरी 2026 को सरगुजा पुलिस ने चंगाई सभा की आड़ में मतांतरण कराने के आरोप में रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर ओमेगा टोप्पो को गिरफ्तार किया। उनके निवास पर 50–60 लोगों की मौजूदगी बताई गई।
केस 03: कांकेर में प्रलोभन का आरोप: 5 जनवरी 2026 को कांकेर में एक प्रार्थना सभा को लेकर ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया। आरोप था कि आर्थिक प्रलोभन देकर मतांतरण कराया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में तनाव फैल गया।




