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लगातार 9 बजट पेश कर बनीं रिकॉर्डधारी, निर्मला सीतारमण का ऐतिहासिक पल

Budget 2026-27 में इतिहास रचते हुए निर्मला सीतारमण ने लगातार नौवीं बार बजट पेश किया। रविवार को पहली बार बजट, शेयर बाजार में गिरावट और बजट की प्रमुख घोषणाएं।

नई दिल्ली. केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इतिहास रच दिया है। वह लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट पेश करने वाली देश की पहली वित्त मंत्री बन गई हैं। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

इस मामले में कांग्रेस नेता पी चिदंबरम दूसरे स्थान पर हैं, जिन्होंने तीन दशकों में कुल 9 बार केंद्रीय बजट पेश किया था। वहीं, अब तक सबसे अधिक बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के नाम है। यदि अगले वर्ष भी निर्मला सीतारमण बजट पेश करती हैं, तो वह मोरारजी देसाई का यह रिकॉर्ड भी तोड़ देंगी।

रविवार को बजट पेश होने का पहला मौका

इस बार के बजट ने एक और इतिहास बनाया है। भारत में पहली बार रविवार को केंद्रीय बजट पेश किया गया। आमतौर पर रविवार को स्टॉक मार्केट और सरकारी कार्यालय बंद रहते हैं, लेकिन बजट के कारण आज BSE और NSE में ट्रेडिंग जारी रही।
हालांकि, बजट पेश होते ही शेयर बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई।

1999 की मिसाल, लेकिन इस बार नहीं टला बजट

आमतौर पर जब बजट के दिन रविवार पड़ता था, तो इसे अगले कार्यदिवस के लिए टाल दिया जाता था। वर्ष 1999 में, जब यशवंत सिन्हा वित्त मंत्री थे, तब ऐसा ही किया गया था। लेकिन इस बार 1 फरवरी को रविवार होने के बावजूद बजट को लोकसभा में तय समय पर ही पेश किया गया।

बजट भाषण की प्रमुख घोषणाएं

अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री ने कई अहम कर और नीति सुधारों की घोषणा की—

  • आईटी सेवाओं के लिए सुरक्षित स्थल (Safe Harbour) का लाभ उठाने की सीमा ₹300 करोड़ से बढ़ाकर ₹2,000 करोड़ की गई।
  • शराब, स्क्रैप (कबाड़) और खनिज पर स्रोत पर कर संग्रह (TCS) की दर को तर्कसंगत बनाकर 2 प्रतिशत किया गया।
  • स्वदेशी लेखा कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए सुरक्षित आश्रय नियमों के तहत लेखाकारों की परिभाषा को युक्तिसंगत बनाया गया।
  • नई कर व्यवस्था के तहत अंतर-सहकारी समितियों के लाभांश आय को कटौती के रूप में स्वीकार करने की घोषणा की गई।

ऐतिहासिक बजट की ओर एक और कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि बजट 2026-27 न केवल ऐतिहासिक उपलब्धियों के कारण, बल्कि कर सुधारों और नीतिगत बदलावों के चलते भी आने वाले वर्षों में अहम भूमिका निभाएगा।

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