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महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल! फडणवीस और शिंदे की दो घंटे लंबी मीटिंग, क्या था खास एजेंडा?

बीएमसी चुनाव से पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के बीच दो घंटे की अहम बैठक हुई। महायुति में 150 सीटों पर सहमति, शेष सीटों पर मंथन जारी।

नई दिल्ली. महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों के बाद अब सभी की निगाहें मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनाव पर टिक गई हैं। परंपरागत रूप से मजबूत माने जाने वाले भाजपा और शिवसेना के बीच इस बार सीटों को लेकर रस्साकशी देखने को मिल रही है। इसी खींचतान को सुलझाने के उद्देश्य से रविवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच करीब दो घंटे लंबी अहम बैठक हुई।

वर्षा बंगले पर हुई महायुति की अहम बैठक

यह बैठक सीएम फडणवीस के सरकारी आवास वर्षा बंगले पर आयोजित हुई। सूत्रों के अनुसार, भाजपा, शिंदे गुट की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी के बीच बने महायुति गठबंधन में कुल 227 सीटों वाली बीएमसी में 150 सीटों पर सहमति बन चुकी है। हालांकि शेष 77 सीटों को लेकर अब भी मंथन जारी है।

30–35 सीटों पर बनी सहमति, 40 पर अभी अटका पेंच

बताया जा रहा है कि रविवार की बैठक में करीब 30 से 35 सीटों के फार्मूले पर सहमति बन गई है, जबकि लगभग 40 सीटों को लेकर बातचीत अभी बाकी है। इन्हीं सीटों को लेकर दोनों दलों के बीच सबसे ज्यादा खींचतान मानी जा रही है।

फडणवीस की भाजपा कार्यकर्ताओं को सख्त नसीहत

बैठक के बाद देवेंद्र फडणवीस ने भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी नेता या कार्यकर्ता सहयोगी दलों के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी या हमले से बचे। देश के सबसे समृद्ध नगर निकाय माने जाने वाले बृहन्मुंबई नगर निगम के चुनाव को लेकर भाजपा बेहद उत्साहित है और किसी भी तरह का आंतरिक विवाद नुकसानदेह हो सकता है।

शिवसेना के लिए शक्ति प्रदर्शन का चुनाव

एकनाथ शिंदे के लिए बीएमसी चुनाव केवल एक स्थानीय निकाय चुनाव नहीं, बल्कि शिवसेना के शक्ति प्रदर्शन का अवसर माना जा रहा है। हालिया निकाय चुनावों में शिंदे गुट ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है, ऐसे में वे बीएमसी में अपनी पकड़ कमजोर नहीं होने देना चाहते।

विपक्ष में अभी भी असमंजस

दूसरी ओर कांग्रेस, शरद पवार की एनसीपी और उद्धव ठाकरे की शिवसेना के बीच अब तक कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी है। सीटों के बंटवारे को लेकर विपक्षी खेमे में मतभेद और विवाद की खबरें लगातार सामने आ रही हैं, जिसका सीधा फायदा महायुति को मिलने की संभावना जताई जा रही है।

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