मेडिकल स्टोर अग्निकांड पर सख्त रुख, बीमा कंपनी को भुगतान का आदेश
भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग ने आग से जले मेडिकल स्टोर के बीमा क्लेम को खारिज करने पर टाटा एआईजी को फटकार लगाते हुए 5.13 लाख रुपये भुगतान का आदेश दिया। सर्वेयर रिपोर्ट के बावजूद भुगतान न करने पर सख्त टिप्पणी।

भोपाल. मुश्किल वक्त में बीमा दावा भुगतान से इनकार करने की प्रवृत्ति पर भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने एक अहम फैसले में उपभोक्ता को राहत देते हुए 5.13 लाख रुपये का बीमा दावा भुगतान करने का आदेश दिया। मामला मेडिकल स्टोर में आग लगने से हुए भारी नुकसान से जुड़ा है, जहां बीमा कंपनी ने दस्तावेज़ी विसंगतियों का हवाला देकर भुगतान से पल्ला झाड़ लिया था।
ऋण और बीमा का विवरण
गांधीनगर निवासी रमेश मेडिकल स्टोर के संचालक मंटू भारती ने दुकान के लिए बैंक से ऋण लिया था। ऋण के तहत उन्होंने टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस से बीमा कराया और नियमित रूप से ₹2,500 मासिक प्रीमियम का भुगतान किया। बीमा अवधि 21 मई 2022 से मई 2024 तक प्रभावी थी।
अग्निकांड और नुकसान का आकलन
बीमित अवधि के दौरान 30 जून 2024 की रात लगभग 2–3 बजे दुकान में भीषण आग लगी। दवाइयों व अन्य सामग्री के जलने से करीब ₹10 लाख का नुकसान हुआ। पीड़ित ने बीमा क्लेम दायर किया। बीमा कंपनी के नियुक्त सर्वेयर ने मौके पर जांच कर ₹5.05 लाख के नुकसान की पुष्टि की, इसके बावजूद क्लेम को पूरी तरह खारिज कर दिया गया।
उपभोक्ता आयोग का फैसला
न्याय की मांग करते हुए पीड़ित ने मार्च 2025 में उपभोक्ता आयोग का रुख किया। अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ल और सदस्य डॉ. प्रतिभा पांडेय की पीठ ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह गांधी नगर स्थित रमेश मेडिकल स्टोर के संचालक को क्षतिपूर्ति स्वरूप ₹5.13 लाख का भुगतान करे।
आयोग की सख्त टिप्पणी
आयोग ने टिप्पणी की कि एक व्यवसायी का रोजगार प्रभावित हुआ और कंपनी ने राहत देने के बजाय कागजी विसंगतियों का बहाना बनाया। उपभोक्ता मामले की अधिवक्ता मोना पालीवाल ने बताया कि आयोग ने स्पष्ट कहा—जब सर्वेयर नुकसान का आकलन कर चुका था, तो कम से कम उतनी राशि का तत्काल भुगतान किया जाना चाहिए था। कागजी त्रुटियों के आधार पर किसी का वैध हक छीना नहीं जा सकता।




