पेड़ कटे तो दम घुटेगा! अयोध्या बायपास प्रोजेक्ट पर NGT की रोक बरकरार
भोपाल अयोध्या बायपास 10 लेन परियोजना पर एनजीटी का बड़ा फैसला। 8–12 हजार पेड़ों की कटाई पर रोक बरकरार, पूरे देश के लिए समान पर्यावरण नीति की दिशा में ऐतिहासिक कदम।

भोपाल. विकास बनाम पर्यावरण की जंग में फिलहाल हरियाली की जीत होती दिख रही है। भोपाल के अयोध्या बायपास रोड को 10 लेन बनाने के लिए प्रस्तावित हजारों पेड़ों की कटाई पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाते हुए पहले से लगी रोक को बरकरार रखा है। इतना ही नहीं, एनजीटी ने इस मामले को केवल भोपाल तक सीमित न रखते हुए पूरे देश के लिए एक समान नीति बनाने की दिशा में बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है, ताकि विकास की आड़ में पेड़ों का अंधाधुंध सफाया न हो।
विकास के साथ पर्यावरण संतुलन जरूरी: एनजीटी
यह फैसला नितिन सक्सेना बनाम राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) प्रकरण में सुनाया गया। न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने कहा कि सड़क, पुल और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए पेड़ों की कटाई को लेकर पूरे देश में एक समान, पारदर्शी और सख्त नीति होना आवश्यक है।
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि आर्थिक प्रगति तभी सार्थक है, जब वह पर्यावरण संरक्षण के साथ संतुलन बनाए। इसी के साथ इस प्रकरण को एनजीटी की प्रधान पीठ, नई दिल्ली स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए हैं।
अयोध्या बायपास के लिए कटने थे 8 से 12 हजार पेड़
भोपाल के अयोध्या बायपास पर प्रस्तावित 10 लेन सड़क परियोजना के तहत आसाराम तिराहा से करोंद होते हुए रत्नागिरी तिराहा तक करीब 16 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जानी थी। इसके लिए 8 से 12 हजार पेड़ों की कटाई प्रस्तावित थी।
एनजीटी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन उसके नाम पर प्रकृति की बलि स्वीकार्य नहीं हो सकती।
“ये पेड़ नहीं, भोपाल की सांसें हैं”
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि ये पेड़ केवल लकड़ी नहीं, बल्कि भोपाल के नागरिकों के लिए ऑक्सीजन और जीवन का आधार हैं।
वहीं एनएचएआई ने परियोजना की आवश्यकता और समयबद्धता का हवाला दिया। इस बीच यह तथ्य भी सामने आया कि पहले दिए गए स्थगन आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील को वापस ले लिया गया है, लेकिन इसका कोई आधिकारिक दस्तावेज पेश नहीं किया गया।
इस पर एनजीटी ने साफ किया कि जब तक सुप्रीम कोर्ट में अपील की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक कटाई पर लगी रोक जारी रहेगी और ट्रिब्यूनल इस मामले में आगे सुनवाई नहीं करेगा।
पूरे देश के लिए मिसाल बनेगा फैसला
एनजीटी ने पेड़ों को “शहर के फेफड़े” बताते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को भी दोहराया, जिसके तहत किसी भी प्रकार की पेड़ कटाई या छंटाई से पहले एनजीटी की समिति की अनुमति अनिवार्य है।
पर्यावरणविदों का मानना है कि यह फैसला देशभर के लिए एक मजबूत संदेश है—अब विकास की राह हरियाली को कुचलकर नहीं, बल्कि उसे साथ लेकर ही तय होगी।




