वास्तु अलर्ट: बाथरूम की गलत जगह से आ सकता है पैसों का संकट
बाथरूम के लिए सही दिशा क्या होनी चाहिए? जानिए वास्तु शास्त्र के अनुसार बाथरूम, टॉयलेट सीट और पानी के बहाव की सही दिशा, ताकि घर में सुख-शांति बनी रहे।

घर बनवाते समय वास्तु शास्त्र से जुड़े नियमों का पालन करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है और जीवन में सुख-शांति रहती है। वहीं बाथरूम का गलत दिशा में निर्माण वास्तु दोष का कारण बन सकता है, जिससे पारिवारिक और आर्थिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे में बाथरूम की दिशा का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है।
बाथरूम के लिए कौन-सी दिशा है शुभ?
वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तर-पश्चिम दिशा बाथरूम के लिए सबसे शुभ मानी जाती है। इस दिशा में बाथरूम होने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। इसके अलावा पश्चिम दिशा में भी बाथरूम का निर्माण किया जा सकता है।
इन दिशाओं में बाथरूम बनवाने से बचें
उत्तर-पूर्व दिशा में बाथरूम नहीं बनवाना चाहिए। यह दिशा देवताओं का स्थान मानी जाती है और यहां बाथरूम होने से आर्थिक तंगी व मानसिक अशांति हो सकती है। घर के बीच (ब्रह्मस्थान) में बाथरूम बनवाने से भी बचना चाहिए। इससे गंभीर वास्तु दोष लगता है, जिसका प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है।
पानी के बहाव की सही दिशा
बाथरूम के फर्श का ढलान पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। वास्तु के अनुसार, ये दिशाएं जल निकासी के लिए उत्तम मानी जाती हैं और नकारात्मकता को बाहर निकालने में सहायक होती हैं।
टॉयलेट सीट की सही दिशा
बाथरूम में टॉयलेट सीट इस प्रकार लगानी चाहिए कि उपयोग के समय व्यक्ति का मुंह उत्तर या दक्षिण दिशा की ओर हो।
पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके बैठना वास्तु के अनुसार उचित नहीं माना जाता।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
- नल और शावर उत्तर या पूर्व दीवार पर लगवाएं।
- शीशा भी उत्तर या पूर्व दिशा की दीवार पर लगाना शुभ होता है, इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- बाथरूम की नियमित साफ-सफाई अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि गंदगी नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती है।




