यूपी में ईवी क्रांति, लखनऊ को मिली अशोक लेलैंड की इलेक्ट्रिक फैक्टरी
लखनऊ में अशोक लेलैंड की इलेक्ट्रिक व्हीकल फैक्टरी का उद्घाटन आज। योगी सरकार के प्रयासों से यूपी को वन ट्रिलियन इकोनॉमी की ओर ले जाने में बड़ा निवेश।

लखनऊ. प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन इकोनॉमी के लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए योगी सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का असर अब स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। निवेश के अनुकूल नीतियों, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकार की सक्रिय पहल के चलते उत्तर प्रदेश निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। इसी कड़ी में देश की अग्रणी वाणिज्यिक वाहन निर्माता कंपनी अशोक लेलैंड लखनऊ में इलेक्ट्रिक व्हीकल निर्माण पर केंद्रित अपनी नई फैक्टरी का उद्घाटन शुक्रवार 9 जनवरी को करने जा रही है।
शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी में होगा उद्घाटन
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के उद्घाटन अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ भारत सरकार के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उपक्रम मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।
सरोजिनी नगर एक्सटेंशन-1 में भव्य समारोह
उद्घाटन समारोह लखनऊ के कानपुर रोड स्थित औद्योगिक क्षेत्र सरोजिनी नगर एक्सटेंशन-1 में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में प्रदेश के दोनों उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह तथा सरोजनीनगर विधायक राजेश्वर सिंह भी मौजूद रहेंगे। कंपनी की ओर से अशोक लेलैंड प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन धीरज हिन्दुजा और प्रबंध निदेशक एवं सीईओ शेनू अग्रवाल भी समारोह में शामिल होंगे।
इलेक्ट्रिक व्हीकल उत्पादन पर रहेगा फोकस
यह संयंत्र लखनऊ के उसी औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित किया गया है, जिसे पहले स्कूटर्स इंडिया साइट के नाम से जाना जाता था। नई इकाई विशेष रूप से इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के निर्माण पर केंद्रित होगी, जिससे राज्य में स्वच्छ, हरित और टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। कंपनी प्रबंधन के अनुसार, यह फैक्टरी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेगमेंट में अशोक लेलैंड की क्षमताओं को और सशक्त बनाएगी।
हरित औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन
अशोक लेलैंड की यह नई फैक्टरी उत्तर प्रदेश में न केवल हरित औद्योगिक विकास को गति देगी, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन, तकनीकी नवाचार और निवेश के नए अवसर भी पैदा करेगी। इसे प्रदेश के औद्योगिक भविष्य और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अहम उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।




