राजनीतिक

प्रफुल्ल पटेल के कदम से बदला समीकरण, शरद पवार की मंशा पर संशय

Ajit Pawar के निधन के बाद NCP की राजनीति में बड़ा बदलाव। सुनेत्रा पवार बनीं डिप्टी सीएम, पार्टी अध्यक्ष बनाए जाने की तैयारी, शरद पवार गुट से विलय की अटकलों पर विराम।

मुंबई. महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के हालिया विमान हादसे में निधन के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। उनके निधन के महज चौथे दिन उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिला दी गई, जिससे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की आंतरिक राजनीति पूरी तरह बदलती नजर आ रही है।

हालांकि निधन को अभी सात दिन भी नहीं हुए हैं, लेकिन पार्टी और राज्य की राजनीति में तेजी से फैसले लिए जा रहे हैं। गौरतलब है कि स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान अजित पवार ने एनसीपी के दोनों गुटों के कार्यकर्ताओं के एकजुट होने की इच्छा जताई थी, जिसको लेकर उनकी अपने चाचा शरद पवार से कई दौर की बातचीत भी हुई थी।

परिवार में एकजुटता, राजनीति में नया मोड़

अजित पवार के निधन के बाद परिवार एकजुट होकर इस दुख को सहता नजर आया। सुनेत्रा पवार और उनके बेटों के साथ हर कदम पर परिवार के सदस्य मौजूद रहे। 85 वर्षीय शरद पवार ने भी मीडिया से बातचीत में कहा कि अजित पवार की इच्छा पार्टी को फिर से एकजुट करने की थी।

हालांकि, इन बयानों के कुछ ही घंटों बाद राजनीतिक घटनाक्रम ने नई दिशा ले ली। सुनेत्रा पवार के डिप्टी सीएम बनने के फैसले पर उस समय राजनीतिक हलचल तेज हो गई, जब शरद पवार ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उन्हें इस निर्णय की पूर्व जानकारी नहीं थी।

पर्दे के पीछे कौन कर रहा है रणनीति तय?

कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे इस पूरे घटनाक्रम को संभाल रहे हैं और पार्टी की आगे की दिशा तय करने में उनकी अहम भूमिका है।

सुनेत्रा पवार को पार्टी अध्यक्ष बनाने की तैयारी

डिप्टी सीएम बनने के बाद अब सुनेत्रा पवार को एनसीपी की कमान सौंपने की तैयारी भी शुरू हो गई है। अजित पवार के निधन से पहले पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी उन्हीं के पास थी, जबकि प्रफुल्ल पटेल कार्यकारी अध्यक्ष थे।

प्रफुल्ल पटेल ने खुद को अध्यक्ष पद की दौड़ से बाहर रखते हुए कहा कि पार्टी कार्यकर्ता चाहते हैं कि यह जिम्मेदारी सुनेत्रा पवार संभालें। एक रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र सरकार ने सुनेत्रा पवार को पुणे और बीड़ का पालक मंत्री भी नियुक्त कर दिया है—यह जिम्मेदारी पहले अजित पवार के पास थी।

“यह अजित दादा को सच्ची श्रद्धांजलि होगी”

प्रफुल्ल पटेल ने कहा, “हम सभी चाहते हैं कि सुनेत्रा पवार पार्टी अध्यक्ष का पद संभालें। यह दिवंगत अजित दादा को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। अंतिम फैसला पार्टी की बैठक और कार्यकर्ताओं की भावनाओं के अनुरूप लिया जाएगा।”

शरद पवार गुट से विलय की अटकलों पर विराम

एनसीपी और शरद पवार गुट के संभावित विलय को लेकर चल रही चर्चाओं पर प्रफुल्ल पटेल ने साफ इनकार किया। उन्होंने कहा कि इस वक्त पार्टी का फोकस आंतरिक संगठन और राजनीतिक स्थिरता पर है, न कि विलय पर।

पटेल के मुताबिक, अजित पवार ने अपने जीवनकाल में कई बार स्पष्ट किया था कि दोनों दलों के बीच कोई औपचारिक विलय प्रस्ताव नहीं है और आपसी समन्वय केवल स्थानीय निकाय चुनावों तक सीमित था। उन्होंने यह भी कहा कि अलग-अलग चुनावों में एनसीपी ने विभिन्न दलों के साथ गठबंधन किया था, जिसे विलय से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

शरद पवार को राजनीतिक झटका

अब बड़ा सवाल यह है कि एनसीपी के इस रुख के बाद क्या शरद पवार की पार्टी और परिवार को एकजुट देखने की संभवतः अंतिम इच्छा अधूरी रह जाएगी। अजित पवार को शरद पवार का स्वाभाविक उत्तराधिकारी माना जाता था और उनके निधन से उन्हें गहरा व्यक्तिगत व राजनीतिक आघात पहुंचा है।

हालिया घटनाक्रम से संकेत मिल रहे हैं कि एनसीपी का नया नेतृत्व शरद पवार से राजनीतिक दूरी बना रहा है, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति के अनुभवी रणनीतिकार कहे जाने वाले शरद पवार का सपना अधूरा रह सकता है।

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