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सेहत और दांतों पर खतरा: अंगूठा चूसने की आदत क्यों है नुकसानदायक

वयस्कों में अंगूठा चूसने की आदत से दांत, जबड़ा और बोलने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार यह आदत ओरल इन्फेक्शन और चेहरे की बनावट बिगाड़ने का कारण बन सकती है।

अंगूठा चूसना छोटे बच्चों में एक स्वाभाविक आदत मानी जाती है, जो उम्र के साथ स्वतः समाप्त हो जाती है। हालांकि, वयस्कों में यह आदत बनी रहना सेहत के लिहाज से चिंता का विषय माना जा रहा है। कई लोग तनाव और चिंता कम करने के लिए इस आदत का सहारा लेते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इसके दीर्घकालिक दुष्प्रभाव गंभीर हो सकते हैं।

दांतों और जबड़े की संरचना पर प्रतिकूल प्रभाव

लंबे समय तक अंगूठा चूसने से दांतों की बनावट प्रभावित होती है। इससे ओवरबाइट जैसी समस्या हो सकती है, जिसमें दांत एक-दूसरे के ऊपर ओवरलैप करने लगते हैं। आगे के दांत बाहर की ओर निकल सकते हैं और गाल की मांसपेशियों में खिंचाव आने से चेहरे की बनावट भी प्रभावित हो सकती है।

ओरल इन्फेक्शन का बढ़ता खतरा

हाथों की स्वच्छता हमेशा सुनिश्चित नहीं होती। ऐसे में अंगूठा मुंह में डालने से बैक्टीरिया और गंदगी सीधे मुंह में प्रवेश कर सकते हैं। इससे दांतों और मसूड़ों में संक्रमण, सूजन और अन्य ओरल समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है।

अंगूठे की त्वचा को भी नुकसान

लगातार अंगूठा चूसने से उसकी त्वचा रूखी और कठोर हो सकती है। दरारें पड़ने, खून निकलने और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। कई मामलों में अंगूठे की प्राकृतिक आकृति भी प्रभावित हो सकती है।

मुंह और चेहरे की बनावट पर असर

विशेषज्ञों के अनुसार, यह आदत जबड़े और मुंह की आंतरिक संरचना को प्रभावित कर सकती है। ऊपरी जबड़ा धंस सकता है, जिससे मुंह का हिस्सा संवेदनशील हो जाता है। इसका असर चेहरे की समग्र बनावट पर भी दिखाई दे सकता है।

बोलने में हो सकती है परेशानी

अंगूठा चूसने की आदत केवल दांतों तक सीमित नुकसान नहीं पहुंचाती, बल्कि बोलने की क्षमता पर भी असर डाल सकती है। कुछ लोगों में तुतलाने जैसी समस्या विकसित हो सकती है, जिससे सामाजिक असहजता और आत्मविश्वास में कमी आ सकती है।

विशेषज्ञों की सलाह

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वयस्कों में यह आदत बनी हुई है, तो इसे धीरे-धीरे छोड़ने के लिए मनोवैज्ञानिक परामर्श, तनाव प्रबंधन तकनीक और दंत चिकित्सक की सलाह ली जानी चाहिए।

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