स्वास्थ्य संकट की दस्तक: प्रदूषित हवा से अस्पतालों में बढ़ी भर्ती
भारत में वायु प्रदूषण कोविड-19 के बाद सबसे बड़ा स्वास्थ्य संकट बन गया है। ब्रिटेन में कार्यरत वरिष्ठ डॉक्टरों की चेतावनी—दिल्ली में सांस के मरीज 30% तक बढ़े, समय रहते कदम न उठाए तो हालात और बिगड़ेंगे।
नई दिल्ली. भारत में वायु प्रदूषण अब कोविड-19 महामारी के बाद सबसे बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बनकर उभर गया है। ब्रिटेन में कार्यरत भारत के कई वरिष्ठ डॉक्टरों ने इस पर गंभीर चिंता जताते हुए चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और भी भयावह रूप ले सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि प्रदूषण का असर न केवल आम लोगों की सेहत पर पड़ेगा, बल्कि देश की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था पर इसका दीर्घकालिक दबाव देखने को मिलेगा।
हृदय रोगों की बढ़ती संख्या में प्रदूषण की बड़ी भूमिका
विशेषज्ञों के अनुसार, बीते 10 वर्षों में हृदय रोगों में आई तेज़ बढ़ोतरी को अक्सर मोटापे से जोड़ा गया, लेकिन इसके पीछे कारों और विमानों से निकलने वाले जहरीले प्रदूषक तत्वों की भी अहम भूमिका है। डॉक्टरों का मानना है कि वायु प्रदूषण धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाता है और इसके प्रभाव वर्षों बाद गंभीर बीमारियों के रूप में सामने आते हैं।
सरकार के फोकस में देरी, उत्तर भारत में नुकसान पहले ही हो चुका
भारत सरकार की कोविड-19 एडवाइजरी कमेटी के पूर्व सदस्य मनीष गौतम ने कहा कि वायु प्रदूषण पर सरकार का ध्यान केंद्रित होना जरूरी है, लेकिन इसमें काफी देरी हो चुकी है।
उन्होंने कहा, “उत्तर भारत में रहने वाले लाखों लोगों को पहले ही नुकसान हो चुका है। जो इलाज किया जा रहा है, वह समस्या का केवल एक छोटा हिस्सा है, मूल कारणों पर अभी भी प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पाया है।”
मामूली समझकर नजरअंदाज किए जा रहे गंभीर लक्षण
डॉक्टरों ने चेताया कि वायु प्रदूषण से जुड़े कई शुरुआती लक्षणों को लोग मामूली मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि ये आगे चलकर गंभीर बीमारियों का संकेत बन सकते हैं। इन लक्षणों में शामिल हैं—
- लगातार सिरदर्द
- थकान और सुस्ती
- हल्की खांसी और गले में जलन
- पाचन संबंधी समस्याएं
- आंखों में सूखापन
- त्वचा पर रैश
- बार-बार संक्रमण
दिसंबर में दिल्ली के अस्पतालों में सांस के मरीज 30% तक बढ़े
डॉक्टरों के मुताबिक, दिसंबर महीने में दिल्ली के अस्पतालों में सांस संबंधी मरीजों की संख्या में 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
चिंताजनक बात यह है कि इनमें बड़ी संख्या में युवा और पहली बार इलाज कराने वाले मरीज शामिल थे, जो इस बात का संकेत है कि वायु प्रदूषण अब केवल बुजुर्गों तक सीमित समस्या नहीं रह गई है।
हर साल और गंभीर होगी स्थिति, तत्काल कदम जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस नीतिगत फैसले, सख्त अमल और जन-जागरूकता अभियान तुरंत नहीं चलाए गए, तो यह संकट हर साल और गहराता जाएगा। वायु प्रदूषण अब सिर्फ पर्यावरण का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल का मुद्दा बन चुका है।




