गाजा संकट पर वॉशिंगटन का स्पष्ट स्टैंड—पहले हथियार छोड़े हमास
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि गाजा में स्थायी शांति हमास के निरस्त्रीकरण के बिना संभव नहीं। जानिए गाजा युद्ध, पुनर्निर्माण और अमेरिका के रुख पर पूरी रिपोर्ट।
वाशिंगटन. अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने गाजा संकट को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि गाजा में स्थायी और टिकाऊ शांति तभी संभव है, जब हमास को भविष्य में इजरायल पर हमला करने की क्षमता से पूरी तरह वंचित कर दिया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शांति प्रयासों का मूल आधार हमास का निरस्त्रीकरण होना चाहिए।
शांति की बुनियाद: हमास का निरस्त्रीकरण
शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में रुबियो ने कहा, “आप ऐसी स्थिति में शांति की कल्पना नहीं कर सकते, जहां हमास भविष्य में इजरायल को धमकी दे सके। इसलिए उसका निरस्त्रीकरण बेहद जरूरी है।”
हालांकि उन्होंने किसी संभावित समझौते या वार्ता के विस्तृत ब्योरे साझा नहीं किए, लेकिन यह साफ किया कि किसी भी शांति समझौते की नींव इसी सिद्धांत पर टिकी होगी।
पुनर्निर्माण पर भी सख्त संदेश
अमेरिकी विदेश मंत्री ने गाजा के पुनर्निर्माण को लेकर भी स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि जब तक सुरक्षा की ठोस गारंटी नहीं होगी, तब तक कोई भी देश या निवेशक गाजा में निवेश के लिए आगे नहीं आएगा। रुबियो के मुताबिक, “अगर लोगों को यह लगे कि दो-तीन साल में फिर से युद्ध छिड़ जाएगा, तो कोई भी वहां पैसा लगाने को तैयार नहीं होगा।”
हमले दोहराए गए तो शांति असंभव
रुबियो ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में हमास ने फिर से रॉकेट दागे, इजरायली नागरिकों की हत्या की या 7 अक्टूबर जैसे किसी बड़े आतंकी हमले को अंजाम दिया, तो शांति की सारी कोशिशें विफल हो जाएंगी। उन्होंने दोहराया कि कोई भी पक्ष दोबारा युद्ध नहीं चाहता।
निरस्त्रीकरण के लिए सभी पक्षों की सहमति जरूरी
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि निरस्त्रीकरण की किसी भी प्रक्रिया के लिए सभी संबंधित पक्षों की सहमति अनिवार्य होगी। इसमें हमास के साथ-साथ इजरायल की सहमति भी जरूरी है, तभी कोई स्थायी व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू हो सकेगी।
7 अक्टूबर हमले के बाद शुरू हुआ मौजूदा युद्ध
गौरतलब है कि गाजा में मौजूदा युद्ध की शुरुआत हमास के 7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद हुई थी, जिसमें करीब 1,200 लोगों की मौत हुई थी। इसके जवाब में इजरायल ने गाजा में व्यापक सैन्य अभियान चलाया। इस संघर्ष में अब तक हजारों फ़िलिस्तीनी मारे जा चुके हैं और गाजा में भारी तबाही हुई है।
अमेरिका का रुख: सुरक्षा के साथ मानवीय सहायता
अमेरिका, इजरायल के समर्थन के साथ-साथ गाजा के लिए मानवीय सहायता और युद्ध के बाद की योजना पर भी जोर देता रहा है। वाशिंगटन का मानना है कि गाजा का भविष्य तभी सुरक्षित हो सकता है, जब वहां से सशस्त्र गुटों का नियंत्रण समाप्त हो और एक प्रभावी व जिम्मेदार शासन व्यवस्था स्थापित की जाए।




